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किडनी कांड : मेरठ और कानपुर से डॉक्टर और टेक्नीशियन को उठाया

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अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच की आंच अब मेरठ तक पहुँच गई है। कानपुर स्वॉट टीम ने लगातार दूसरे दिन मेरठ में डेरा डाले रखा और यहाँ के अल्फा अस्पताल के स्टाफ से गहन पूछताछ की। इस दौरान पुलिस ने अस्पताल के डीवीआर को भी खंगाला है।
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मेरठ पुलिस और कानपुर की संयुक्त टीम ने इस प्रकरण में एक डॉक्टर और एक टेक्नीशियन को हिरासत में लिया है। इन पर किडनी डोनर (दाता) और रिसीवर (लेने वाले) के बीच सेटिंग कराने का गंभीर आरोप है। मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि फरार चल रहे डॉ. अफजाल और डॉ. वैभव मुद्गल के गुर्गों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। डॉ. अफजाल की मेडिकल डिग्री की सत्यता जांची जा रही है। साथ ही, डॉ. वैभव और डॉ. अफजाल के मोबाइल नंबरों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि मरीजों से इनका संपर्क कैसे होता था और इस पूरे नेटवर्क की चेन कहाँ तक जुड़ी है।
पुलिस के अनुसार डॉ. अफजाल और डॉ. वैभव लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद ली जा रही है।

कानपुर और एनसीआर में जांच का दायरा बढ़ा
कानपुर पुलिस इस गिरोह के नेटवर्क को खंगालने के लिए अब दिल्ली और एनसीआर के अन्य शहरों में भी दबिश दे रही है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने एनसीआर क्षेत्र में आरोपियों की मौजूदगी की सूचना पर दो और नई टीमें रवाना की हैं। अब इस मामले में कुल 12 टीमें काम कर रही हैं। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने खुलासा किया कि आरोपियों के व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स की जांच में कई नए नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
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एनेस्थीसिया डॉक्टर को छोड़ा
बृहस्पतिवार को हिरासत में लिए गए एनेस्थीसिया के डॉक्टर को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। जांच में पाया गया कि उन्होंने केशवपुरम के नर्सिंग होम में एक मरीज का परीक्षण किया था, लेकिन उसकी हालत गंभीर देख उन्होंने ट्रांसप्लांट की अनुमति नहीं दी थी।
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