बेगमबाग निवासी पंतजली कपूर का घर म्यूजियम सा नजर आता है। बाहर से ही इस घर की विशेषता का अहसास हो जाता है। पत्थरों, लकड़ियों को कलाकृतियों में तराशकर उन्हें घर के कोनों, दीवारों और छतों पर लगाने में परिवार ने 46 साल लगा दिए हैं। आज भी यह काम निरंतर जारी है। घर में बेकार पड़े बर्तन, लकड़ी का उपयोग कोई इनसे सीखे। घर के हर कोने में इनके हुनर की अलग ही छाप है।
46 साल से चल रही है सजावट
202 बेगमबाग निवासी पंतजली कपूर के परिवार में उनकी पत्नी वीना कपूर और बेटी मंदाकिनी कपूर हैं। पंतजली कपूर ने बताया कि वह डिफेंस एकाउंट में सीनियर ऑडिटर से रिटायर हैं। उन्हें यह शौक 1969 में लगा था। सबसे पहले उन्होंने घर में बेकार पड़े एक लकड़ी के तख्ते पर महात्मा बुद्ध की प्रतिमा को तराशा था। इसके बाद धीरे-धीरे वह लकड़ी के साथ ही पत्थरों पर भी कलाकृति उकेरने लगे। पत्नी वीना ने भी उनका पूरा साथ दिया। वीना शिक्षिका रही हैं। खाली समय में दोनों घर में बैठकर पत्थरों और लकड़ियों पर कलाकृति उकेरते थे। बेटी मंदाकिनी भी जब पांच साल की हुई तो उसने भी मम्मी-पापा को देख तो हाथ में औजार थाम लिये।
घर बन गया पत्थरों का आशियाना
वीना कपूर ने बताया कि एक दिन मन में विचार आया जो प्रतिमाएं बनाईं हैं उन्हें घर में सजाया जाए। एक छोटी सी पत्थर की प्रतिमा को खुद दीवार पर लगाया। उसके बाद पूरे घर की दीवार, रसोई, छत आदि सबको अलग ही रूप दे दिया। लकड़ी की प्रतिमाओं को दरवाजों और बेडरूम की दीवारों पर लगा दिया। घर में पड़ी खराब टिन, पीतल, स्टील आदि को भी सजावट में प्रयोग किया। थाली, प्लेट जो भी मिला, उसे भी तराशकर और काटकर प्रतिमाएं बनाईं। उन्हें कीलों से दरवाजों पर लगा दिया।
लोहे के सरियों से बना दी प्रतिमाएं
घर में जो बेकार सरिये निकले उनका भी प्रयोग किया। उनसे कलाकृतियां बनाईं और खिड़कियों पर वैल्ड करा दिया। यही नहीं लोहे की जाली, सरियों और टिन शेड का बेहतर प्रयोग उन्होंने छज्जे पर उड़न खटोले की तरह लगा दिया।
सोफा, बेड सभी में कारीगरी
परिवार ने घर की हर चीज को अपने हिसाब से तराशा है। ड्राइंग रूम की सैटी को रथ और मोर का रूप दिया है। बेड में जहां भी लकड़ी का उपयोग था, वहां पर सभी में अपने हाथों से तराशकर मूर्तियां बना दीं। इतना ही नहीं अलमारियों के दरवाजे हों या उनके हैंडल, बिजली के स्विच बोर्ड सभी को अपने हुनर से नयी शक्ल दी गई है।
कलाकृतियों में है थीम
कपूर परिवार ने महात्मा बुद्ध, शिव तांडव नृत्य, शिव पार्वती, गणेश, अलोरा की गुुफाओं का दृश्य, घोड़े पर सवार योद्धा ड्रेगन को मारते हुए, हाथी, घोड़े, शेर आदि की तमाम प्रतिमाएं पत्थरों, लकड़ियों और धातुओं से तैयार की हैं। यही नहीं इन प्रतिमाओं को दीवार पर लगाने के साथ पत्थरों के टुकड़ों से उन्हें बेहतरीन ढंग से सजाया है।
रंगों का बेहतरीन प्रयोग
इन प्रतिमाओं को लगाने के बाद परिवार ने रंगों का भी बेहतरीन प्रयोग किया। खुद अपने हाथों से एक-एक पत्थर और प्रतिमा को अलग रंग से सजाया। पत्थरों का आशियाना पूरी तरह कलाकृति का मंदिर जैसा नजर आता है।
मंदाकिनी ने भी अपना लिया शौक
पंतजली कपूर की बेटी एलएलएम है। एक लॉ कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है। लेकिन मंदाकिनी भी अपने खाली समय का प्रयोग अपने पिता के शौक के साथ मिलकर पूरा करती है। मंदाकिनी की बनाई प्रतिमाएं एनएएस कॉलेज और उनके अपने कॉलेज दीवान लॉ कालेज में भी लगी हैं।
एक-दूसरे को गिफ्ट में देते हैं औजार
परिवार के लोग एक-दूसरे के जन्मदिन पर कोई महंगा गिफ्ट नहीं देते हैं। वे औजार, पत्थर और सीमेंट उपहार में देते हैं, ताकि उनके अंदर का कलाकार जिंदा रहे।