शहर में रहने वाले पूर्वांचल के परिवारों ने छठ पर्व के दूसरे दिन बुधवार को छोटी छठ यानी खरना मनाई। महिलाओं ने रात में रसिआव साठी के चावल-गुड़, गाय के दूध की खीर खाने के बाद निर्जला व्रत रखा। शहर में माधवपुरम, पल्लवपुरम, शताब्दीनगर, गंगानगर, शास्त्रीनगर, प्रभात नगर, ब्रह्मपुरी, साकेत आदि सहित विभिन्न इलाकों में छोटी छठ मनाई गई।
पल्लवपुरम में छठ पूजा के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रती महिलाओं ने दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को खरना का प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद लेने के लिए आसपास के लोग व्रतियों के घर पहुंचे। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस की खीर और चुपड़ी रोटी तैयार की गई। इसमें चीनी और नमक का उपयोग नहीं किया गया। इस दौरान कार्तिकेय मैथिल संरक्षक, ललित पिंडारुच, विजय मिश्रा, इन्द्रकुमार , कालीचरण , संजीव झा , दीपक शांडिल्य , प्रो. पीएस झा , अजय कुमार, एसएनझा, पंडित श्रवण झा, एचके झा, बिजेंद्र ठेकेदार, राहुल करमौली, पंडित भक्ति नाथ, पंडित राजू, पदमनाभ झा, डा. एसके झा, डा. एमएम झा, डा. जीके मिश्रा, शंकर झा, उग्रनाथ झा, शामिल रहे। व्रतियों में चांद देवी, सुनैना, ललिता, साधना, रुबी, कुमकुम, आरती, ज्योति, मंजु पिंडारुच, कोमल, रंजना यादव, डॉली चौहान, एकता चौहान एवं भावना शामिल रहीं। कार्तिकेय मैथिल संरक्षक ने बताया कि छठ पर्व छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है।
आज डूबते सूर्य को देंगी अर्घ्य
बृहस्पतिवार को छठ पर्व के तीसरे दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर संतान प्राप्ति और पति की लंबी उम्र की कामना के साथ नदी या पोखर के जल में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। साथ ही छठ माता से मंगल कामना करेंगी। महानगर में छठ पर्व के अवसर पर गगोल तीर्थ, गांधी आश्रम धोबीघाट, भोले की झाल आदि स्थानों पर मनाया जाता है।