खरखौदा स्थित जामा मस्जिद को सरकारी जमीन पर बना बताकर उसे गिराने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके विरोध में सोमवार को नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन सिद्दीकी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मेरठ मंडल के एडीजी भानु भास्कर से मिला। मस्जिद के दस्तावेजों की सही से जांच कर इसे बचाने की मांग की। इस संबंध में और सुबूत पेश करने के लिए सात दिन का और समय मांगा है।
नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन सिद्दीकी ने कहा कि यह जामा मस्जिद 1989 से ही उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड में विधिवत दर्ज है। इसका पंजीकरण क्रमांक 3300/2825 है। मस्जिद के मुतवल्ली अय्यूब खां ने पंजीकरण से जुड़े सभी अहम दस्तावेज और सुबूत खरखौदा थाने में पहले ही जमा करा दिए हैं। इसके अलावा मस्जिद पक्ष की ओर से और भी आवश्यक कागजात और पुख्ता सुबूत पेश करने के लिए उन्होंने सात दिन की अतिरिक्त मोहलत मांगी।
एडीजी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुनकर न्यायोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को एसएसपी से भी मिलकर अपना पक्ष रखने की सलाह दी। प्रतिनिधिमंडल में नायब शहर काजी के साथ काज़ी शादान, हाजी शीराज रहमान और मोहम्मद वसीम आदि शामिल रहे।
ये है मामला
खरखौदा थाने पर पुलिस कर्मियों के लिए बनाई गई बिल्डिंग की हालत जर्जर है। विभाग द्वारा नए निर्माण के लिए परिसर में जगह चिन्हित करने का खरखौदा थाने को आदेश दिया गया। खरखौदा पुलिस द्वारा अपने मालखाना रजिस्टर में अंकित खरखौदा थाने के नाम भूमि का जब आकलन किया तो थाना परिसर में ही पीछे की ओर बनी मस्जिद अवैध मिली बताई गई। खरखौदा पुलिस द्वारा राजस्व विभाग की टीम को बुलाकर मौके की पैमाइश कराई गई।
राजस्व विभाग के लेखपाल व तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में खरखौदा थाने के नाम 6450 वर्ग मीटर भूमि में से करीब 310 मीटर भूमि कम बताते हुए थाना परिसर में ही बनी मस्जिद को थाना की जमीन में ही निर्मित बताया था। खरखौदा थाना पर जमीन से संबंधित सभी साक्ष्य अभिलेखों में दर्ज हैं। जिसको लेकर खरखौदा थाना प्रभारी ने सात दिन का समय देते हुए मस्जिद के इमाम को मस्जिद की जमीन से संबंधित कागजात जमा करने का नोटिस दिया था।
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