कॉरपोरेट लुक जैसा सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस बनाने में पुलिस का एक रुपये तक नहीं लगा। इस ऑफिस को बनाने में करीब दस लाख रुपये का खर्चा हुआ है, जोकि पुलिस को चंदे में मिला। चर्चा है कि चंदा देने वाले लोगों को पुलिस ने खुली छूट दे दी है। यह लाजिमी भी है कि जो पुलिस के ऐशोआराम पर खर्चा करेगा तो उस पर कार्रवाई क्यों होगी।
ब्रह्मपुरी में डकैती के बाद बेखौफ बदमाशों ने तांडव मचाया। स्थानीय लोग, व्यापारियों में गुस्सा है कि सीओ ब्रह्मपुरी का ऑफिस घनी आबादी से सारे नियम कानून ताक पर रखकर शहर से बाहर शॉप्रिक्स मॉल के सामने शिफ्ट कर दिया। ब्रह्मपुरी कांड में पुलिस समय से पहुंच जाती तो शायद अभिषेक की जान बच जाती। संवेदनशील इलाके से हटाकर खुले में सीओ का ऑफिस शिफ्ट होने की चर्चा पुलिस विभाग में भी तेजी से फैल रही है।
पुलिस के मुताबिक सीओ ब्रह्मपुरी के नये ऑफिस में चार एसी, दो एलईडी लगाकर शानदार ऑफिस बनाया गया है। इसके निर्माण में करीब दस लाख रुपये का खर्चा होने का आंकलन खुद पुलिस ही कर रही है। लेकिन ऑफिस देखकर लगता है कि इसमें दस लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है। कमाल की बात है कि पुलिस विभाग द्वारा एक रुपये भी इस ऑफिस में खर्च नहीं किया। यह बात सीओ ब्रह्मपुरी धर्मेंद्र चौहान ने खुद स्वीकार की है कि पैसा पुलिस का नहीं लगा, सारा पैसा बड़े लोगों ने लगाया है।
अब कैसे करेंगे कार्रवाई
सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस में कुछ चुनिंदा लोगों ने ही पैसा लगाया है। बिजली का बिल तक पुलिस के नाम नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बड़े लोग गलती करेंगे, तो पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कैसे कर पाएगी। कुछ दिनों से चंदा देने वालों पर पुलिस का रहमोकरम चल भी रहा है। जब से सीओ का नया ऑफिस बना है, चंदा देने वालों से पुलिस की गहरी दोस्ती हो गई। इसकी चर्चा भी पुलिस में है।