खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ही सरकार की खाद्य सुरक्षा योजना को पलीता लगा रहा है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और शहर विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अकेले मेरठ जनपद में ही जब से योजना लागू हुई है, करोड़ों का घोटाला विभागीय साठगांठ से हो चुका है। क्याेंकि राशन कार्ड बनाने में भारी धांधली हुई है।
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी शुक्रवार को जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय पहुंचे और वहां मौजूद अधिकारियों से 17 बिंदुओं पर जानकारी मांगी। वाजपेयी ने शाम को अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि जनवरी 2016 में खाद्य सुरक्षा योजना लागू हुई थी। इस योजना से पूर्व मेरठ जनपद में लगभग 7.54 लाख राशन कार्ड थे, जो अब 5.91 हजार रह गए हैं।
राशन कार्ड बनाने में हुआ खेल
वाजपेयी ने बताया कि राशन कार्ड बनाते वक्त चयनित सूची का कोई विज्ञापन जो नियमानुसार प्रकाशित होना चाहिए था, वह भी नहीं हुआ। राशन कार्ड दुकानदार को दे दिए गए जो उसने पूरे नहीं बांटे और न ही सूची अपनी दुकान के बाहर चस्पा की। यही नहीं राशन कार्ड पर जो राशन वितरण के लिए अलग से पेज जारी हुआ था, वह राशन डीलर ने अपने पास ही रोक लिया। इसके अलावा राशन कार्ड वितरण के बाद प्राप्ति की रसीद उपभोक्ता से लेनी थी, जो नहीं ली गयी। इससे पूरी तरह सिद्ध होता है कि इसमें बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है।
जांच हो तो घोटाला सामने आ जाएगा
वाजपेयी ने कहा कि किसी भी राशन कार्ड पर उपभोक्ता का आधार नंबर, मोबाइल नंबर बैंक खाता संख्या दर्ज नहीं है। जबकि नियमानुसार यह दर्ज होना चाहिए था। वाजपेयी ने कहा कि निगम, तहसील और सिविल डिफेंस के लोग घर-घर जाकर जांच करे तो पूरा घोटाला सामने आ सकता है। क्योंकि इस फर्जीवाड़े में वास्तविक पात्र व्यक्ति योजना से वंचित रह गए हैं।
शिकायत नहीं हम खुद करेंगे ठीक
वाजपेयी ने इस मामले की शिकायत किस स्तर पर करेंगे? इस सवाल पर कहा कि इसकी शिकायत नहीं करेंगे, बल्कि खुद आपूर्ति विभाग पर दबाव बनाकर इसे ठीक कराएंगे। आपूर्ति विभाग के ही सूचना तंत्रों के माध्यम ये पूरा घोटाला सामने लाया जाएगा।