- क्षेत्र में 15 साल से थमे हैं बसों के पहिये, शिक्षा रोजगार और इलाज के लिए भटकते हैं ग्रामीण
शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए जूझ रहे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से परिवहन सेवा ठप होने से करीब 50 हजार की आबादी सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर है। बसों का संचालन बंद होने से ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित है। वहीं आवागमन के साधनों के अभाव में छात्रों का भविष्य भी दांव पर लगा है।
हस्तिनापुर-मखदूमपुर से रामराज मार्ग पर स्थित 35 से अधिक गांवों के ग्रामीण आज भी नियमित बस सेवा बहाली का इंतजार कर रहे हैं। कभी निजी तो कभी रोडवेज बसों से गुलजार रहने वाला यह इलाका अब परिवहन सुविधाओं से कोसों दूर है। क्षेत्र में इंटर कॉलेज न होने के कारण छात्रों को रोजाना हस्तिनापुर या रामराज पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। महंगे निजी वाहनों का खर्च न उठा पाने के कारण कई बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट रही है।
ग्रामीणों का दर्द है कि गंभीर बीमारी में समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से जान का जोखिम बना रहता है। सड़क की जर्जर हालत और बस सेवा के प्रति प्रशासन की उदासीनता ने क्षेत्र को विकास की दौड़ में पिछड़ा बना दिया है। शिकायत पर प्रशासनिक अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन भी फाइलों में ही दबे हुए हैं। सुविधाओं की उम्मीद छोड़कर बैठे लोग अब सिस्टम से शिकायत ही नहीं करते। ग्रामीणों के ये बयान स्पष्ट करते हैं कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा ने उनके दैनिक जीवन को कठिन बना दिया है। परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि शासन के प्रति उनके भरोसे को भी तोड़ रहा है।
खादर क्षेत्र के प्रभावित गांव
किशोरपुर, मखदूमपुर, बस्तोरा नारंग, लतीफपुर, बामनौली, कुन्हेड़ा, रठौरा, तारापुर, फाजलपुर समेत तीन दर्जन गांवों में निजी साधन से अलग परिवहन का कोई साधन ही नहीं है।
हमने अपनी जवानी में यहां बसें चलते देखी थीं, लेकिन आज बुढ़ापे में शहर जाने के लिए घंटों सड़क किनारे खड़े रहना पड़ता है। हम थक चुके हैं, सिर्फ कागजी आश्वासनों से पेट नहीं भरता। -श्रीकिशन चौहान
मेरे लिए पढ़ाई से ज्यादा संघर्ष तो स्कूल तक पहुंचना हो गया है। बस न होने के कारण अक्सर ऑटो या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो बहुत महंगे हैं। -पंकज, छात्र
खादर क्षेत्र में बस सेवा नहीं होने से हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है। शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी ठीक नहीं हैं। निजी वाहनों के सहारे जिंदगी चल रही है। -नरेश कुमार
बस सेवा शुरू करना कोई बड़ा काम नहीं है, परंतु प्रशासन की बेरुखी का आलम यह है कि वह अब हमारी आवाज नहीं सुनते। -सुंदर सिंह
कोट...
खादर क्षेत्र में आवागमन की पहले से परेशानी है। दो बार रोडवेज बसों को चलवाया गया है। यदि बस सेवा बंद हो गई है तो इसकी जानकारी की जाएगी। खादर क्षेत्र में आवागमन की सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रशासन से बात की जाएगी। -दिनेश खटीक, राज्यमंत्री
श्री किशन चौहान
श्री किशन चौहान
श्री किशन चौहान