सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव द्वारा किए गए गबन की जांच कई अधिकारियों तक पहुंच गई है। तत्कालीन कुलपति से लेकर वर्तमान कुल सचिव तक से पूछताछ हो सकती है। विधिक समिति ने जो बिल पास किए हैं कोर्ट के आदेश पर उनकी भी जांच होगी।
फर्जी बिलों के भुगतान के मामले में सहायक कुल सचिव डीएस यादव बच नहीं पाएंगे। मामले की मॉनीटरिंग स्वयं हाईकोर्ट कर रहा है। खास बात यह है कि बिल 2015 के हैं। इस मामले की शिकायत सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल ने हाईकोर्ट में की थी। पूर्व कुल सचिव और वर्तमान कुल सचिव से भी पूछताछ की जाएगी। विधिक समिति ने जो बिल पास किए हैं और उन बिलों पर जिनके हस्ताक्षर हुए हैं, उनसे भी पूछताछ होगी। कोर्ट ने पूछा है कि समिति ने बिल पास कैसे कर दिए।
गिरफ्तारी को पुलिस दे रही दबिश
सहायक कुल सचिव डीएस यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुए आठ दिन हो गए हैं, लेकिन अभी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जांच अधिकारी व एसएसआई दौराला बृजेश चौहान ने बताया कि सहायक कुल सचिव की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। अभी वह हाथ नहीं लगे हैं। मामले से जो भी अधिकारी जुड़े हैं उनसे पूछताछ की जाएगी।
पूर्व कुलपति के समय में हुआ गबन
17 लाख रुपये का गबन पूर्व कुलपति एचएस गौड़ के समय का है। सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट के सख्त रुख से पूर्व कुलपति से भी पूछताछ हो सकती है।
कुलपति ने क्यों खुलवाई ऑफिस की सील
गबन का मामला सीसीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा के समय में पकड़ा गया था। उन्होंने रात 11 बजे ऑफिस सील करा दिया था। 10 मार्च को कुलपति डॉ. गया प्रसाद ने चार्ज लिया था और 15 मार्च को ऑफिस की सील खोल दी गई। सवाल उठता है कि आखिर कुलपति ने सील क्यों खुलवाई।