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कांवड़ यात्रा: 500 करोड़ के व्यापार को झटका, संपूर्ण बाजार को होगी क्षति

Sun, 21 Jun 2020 02:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा कांवड़ यात्रा इस बार नहीं होगी। कोरोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट से जूझ रहे व्यापारियों के लिए यह एक और बड़ा झटका है। हर साल 15-20 दिनों की इस धार्मिक यात्रा में महानगर के बाजारों को करीब 500 करोड़ रुपए की संजीवनी मिलती है। छोटे-बड़े हर वर्ग के व्यापारी को काम मिलता है। लेकिन कांवड़ यात्रा न होने के फैसले से व्यापारियों में मायूसी छा गई है।
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हर साल श्रावण मास में होने वाली कांवड़ यात्रा में मेरठ से हरिद्वार तक मेला सा लगता है। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के शिवभक्त उत्तराखंड के गोमुख और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाते हैं और अपने संबंधित देवालय में शिवरात्रि पर जल चढ़ाते हैं। इन दिनों शहर के प्रमुख बाजारों में छोटे रिटेलर से बड़े व्यापारियों की दुकानें केसरिया रंग से सज जाती हैं। सावन के हर सोमवार को भी स्थानीय देवालयों में विशेष रूप से जल चढ़ाया जाता है।

यह रहता है कांवड़ यात्रा का बाजार

कपड़ों का बाजार

शहर में खंदक बाजार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान मुख्य रुप से अंगोछों की सप्लाई होती है। सीजनल व्यापार होने के कारण बाजार से इस सीजन में 150 से ज्यादा व्यापारी करीब 250 करोड़ रुपए तक का कारोबार करते हैं। इसमें अंगोछों के साथ टीशर्ट, लोवर, शार्ट्स आदि की सप्लाई की जाती हैं। इसके लिए मई और जून से ही ऑर्डर शुरू हो जाते हैं।
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लॉकडाउन के बाद बाजार खुलने पर अब इन सामानों की सप्लाई शुरू हुई है। व्यापारियों के अनुसार कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने से सभी ऑर्डर कैंसल हो जाएंगे। ऐसे में व्यापारियों को 250 करोड़ के आसपास नुकसान होगा।
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टेंट से लेकर मिठाई तक
कपड़े के बाजार के अलावा कांवड़ यात्रा में इस यात्रा से जुड़े हर बाजार को फायदा मिलता है। जैसे सबसे ज्यादा टेंट हाउस को काम मिलता है। कांवड़ सेवा शिविर हो या फिर अन्य प्रयोजन, मोहिउद्दीनपुर से दौराला तक जगह-जगह टेंट और जेनरेटर ही लगाए जाते हैं। इनकी बुकिंग एडवांस ही की जाती है।

इसके अलावा इन शिविरों में डीजे और बड़ी लाइटों की भी मांग रहती है। कांवड़ शिविरों में शिवभक्तों के लिए भंडारा बनाने के लिए हलवाइयों की भी पहले से ही बुकिंग हो जाती है। वहीं, खाद्य सामग्री, फल और सब्जियों का बाजार भी अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा तेज रहता है। इनके अलावा फूल, इत्र और मिष्ठान का बाजार अलग से महकता है।

इन बाजारों में होती है सेल
शहर में कांवड़ यात्रा के दौरान बजाजा, वैली बाजार, शारदा रोड, लालकुर्ती, सेंट्रल मार्केट, बेगमपुल, आबूलेन, सदर, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, रिठानी, गंगानगर के बाजारों में ज्यादा बिक्री होती है। कई बाजारों में भी व्यापारियों का स्टॉक अगले साल तक के लिए रुक जाएगा। ऐसे में कोरोना के बाद बाजार को भारी नुकसान होगा।

कांवड़ यात्रा से थी उम्मीद
शहर में कांवड़ यात्रा के दौरान 250 के आसपास कांवड़ सेवा शिविर लगाए जाते हैं। आयोजन में टेंट हाउस और मंडप संचालकों को अच्छा कारोबार मिल जाता था। कैटरिंग वालों और हलवाइयों को भी 15 दिन के लिए रोजगार मिलता था।

बोले व्यापारी: संपूर्ण बाजार को होगी क्षति
कांवड़ यात्रा के दौरान एक रेहड़ी वाले से लेकर बड़े कारोबारियों को संजीवनी मिलती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरिद्वार, रुड़की और दिल्ली के व्यापारियों को अच्छी सेल हो जाती थी। प्रतिबंध से मेरठ के बाजार को ही 500 करोड़ का घाटा तय है। - राजीव बंसल, प्रधान, हैंडलूम वस्त्र व्यापार संघ।

कोई काम नहीं बचेगा
कोरोना के चलते मंडप और टेंट हाउस वालों का कारोबार पूरी तरह बंद था। अब कांवड़ यात्रा नहीं होने से हमारे पास इस साल कोई काम शेष नहीं बचेगा। - देवेंद्र गोयल, मेरठ मंडप एसोसिएशन
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