भारी वाहनों के वजन से महानगर की आंतरिक सड़कें समय से पहले ही टूट रही हैं। सड़कों पर सरकारी खजाने को चूना लग रहा है। प्रतिवर्ष भारी वाहनों के कारण करोड़ों से बनी सड़कें कंकरीट में तब्दील हो जाती हैं। रात में भारी वाहनों के कारण शहर में जाम भी बना रहता है। रात्रि नौ बजे के बाद महानगर की आंतरिक सड़कों पर भारी वाहनों का आवागमन शुरू हो जाता है। भारी वाहन कई बार सड़क दुर्घटना का कारण भी बन चुके हैं। यातायात पुलिस है न तो यातायात को सुधार पा रही है और न ही अवैध तरीके से महानगर की सड़कों पर दौड़ने वालों भारी वाहनों को रोक पा रही है।
40 फिट चौड़े मार्ग पर हल्के वाहन
महानगर की आंतरिक सड़कें 40 फिट तक चौड़ी होती हैं। शहर के अंदर सड़कों पर भारी वाहनों प्रतिबंधित होते हैं। इन सड़कों को बनाते समय डैंस के नीचे की परत भी हल्की रखी जाती है। अगर इन सड़कों पर भारी वाहन दौड़ेंगे तो किसी भी कीमत पर पांच साल सड़क नहीं चल सकती है। बार बार सड़क टूटने से सरकारी खजाने को चूना लग रहा है।
60 फिट या इससे अधिक चौड़े मार्ग पर भारी वाहन
पीडब्लूडी के मानक के अनुरूप भारी वाहनों के लिए 60 फिट या इससे अधिक चौड़ा मार्ग होना चाहिए। मास्टर प्लान में यही मानक निश्चित है। इससे कम चौड़े मार्ग पर भारी वाहनों से सड़क समय से पहले ही टूट जाएगी।
टूटी सड़कों को लेकर शासन में उठ चुकी बात
महानगर की सड़कों पर भारी वाहन दौड़ने का मामला कई बार शासन में भी उठ चुका है। नगर निगम और पीडब्लूडी ने पूर्व में महानगर की ऐसी सड़कों का सत्यापन किया है, जिन मार्गों से भारी वाहन गुजरते हैं और वे सड़कें समय से पहले टूट गईं। इसके बाद शासन ने पुलिस प्रशासन को भारी वाहनों को शहर के अंदर की सड़कों से गुजरने पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी।
शासन ने भी निश्चित की सड़कों की उम्र पांच साल
योगी सरकार ने निश्चित कर दिया है कि नगर निगम, आवास विकास, पीडब्लूडी, एमडीए सहित अन्य सभी ऐसे विभाग जो सड़क बनवाते हैं, सड़कों की उम्र पांच साल निर्धारित करेंगे। यानी ठेकेदार को पांच साल तक सड़कों का रखरखाव करना होगा। ऐसी स्थिति में जब हलके वाहनों के लिए बनायी गयी सड़कों पर भारी वाहन दौड़ेंगे तो फिर भला कैसे पांच साल तक सड़कें चल पाएंगी।
इन मार्गों से दौड़ते हैं भारी वाहन
भुमियापुल मार्ग
रात्रि नौ बजे के बाद भारी वाहन दिल्ली रोड से भुमियापुल होते हुए हापुड़ अड्डा चौराहा होकर हापुड़ रोड, गढ़ रोड की तरफ जाते हैं। खासकर भुमियापुल पर रात्रि में 10 टायरा या उससे अधिक टायरों वाले भारी वाहनों का जाम रहता है।
एसएसपी आवास
भारी वाहनों का रैला एसएसपी आवास मार्ग पर भी देखा जा सकता है। दिल्ली रोड से जली कोठी, खैरनगर, बच्चा पार्क, कचहरी से मवाना रोड की तरफ जाने वाले भारी वाहन एसएसपी आवास के सामने से या फिर कमिश्नरी आवास चौराहा से होकर गुजरते हैं।
घंटाघर-खैरनगर चौराहा
रोहटा रोड से सिटी स्टेशन, रेलवे रोड- घंटाघर, जिला अस्पताल से खैरनगर चौराहा होते हुए बच्चा पार्क की तरफ जाने वाले भारी वाहन गुजरते हैं। रात्रि में तो इन मार्गों पर भारी वाहनों का ही कब्जा होता है।
साकेत मार्ग
भारी वाहनों ने आवासीय कालोनी साकेत के मार्गों को भी नहीं बख्शा है। यानी भारी वाहन और माल से लदे ट्रक कैलाश प्रकाश स्टेडियम से धनवंतरी अस्पताल साकेत से होकर एलआईसी मार्ग पहुंचते हैं।
ये मार्ग हैं भारी वाहनों के लिए विकल्प
- दिल्ली रोड से हापुड़ रोड, गढ़ रोड जाने वाले वाहन बिजली बंबा बाईपास से होकर गुजरने चाहिए,
- दिल्ली रोड से मवाना रोड और किला रोड़ जाने वाले वाहन बेगमपुल से जीरोमाइल के रास्ते कमिश्नरी आवास चौराहा पहुंच सकते हैं।
- महानगर के अंदर की सड़कें हल्के वाहनों के लिए बनाई जाती हैं। लेकिन इन सड़कों पर भारी वाहनों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। पूर्व में पीडब्लूडी के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों के सामने भी मामला रखा गया है। ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह आंतरिक सड़कों पर भारी वाहन न चलने दें। ताकी सड़कें पांच साल से भी अधिक समय तक ठीक रहें।
कुलभूषण वार्ष्णेय, चीफ इंजीनियर नगर निगम।