पिछले सात दिन से शहर में करीब सात हजार टन कूड़ा पड़ा सड़ रहा है लेकिन जिम्मेदार हाकिम और शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि सो रहे हैं। शहर का ऐसा कोई खत्ताघर नहीं है जहां कूड़े की पहाड़ी खड़ी नहीं हो गई है। पिछले सात दिन से कूड़े का निपटान नहीं होने से शहर में करीब सात हजार टन कूड़ा जमा हो गया है। इसके बावजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इसकी कोई फिक्र नहीं है। बृहस्पतिवार को ढलावघर पर कूडे़ के लिए जगह नहीं होने पर सफाई कर्मी सड़क किनारे ढेर लगाकर चले आए। लेडीज पार्क के पास बने ढलावघर के बाहर तक कूड़ा आने का लोगों ने इसका विरोध किया तो सफाई कर्मचारियों ने बताया कि जेसीबी मंगाकर इसे ऊपर खिंचवा दिया जाएगा। लेकिन शाम तक भी जेसीबी इसे उठाने नहीं पहुंची। यही हाल मेघदूत पुलिया पर बने खत्ताघर का भी रहा। यहां पर लोगों का निकलना तो दूर सांस लेना भी भारी हो रहा है। सड़ते कूड़े से शहर में बीमारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। यही हाल कोटला नाला, ब्रह्मपुरी, साकेत, दिल्ली रोड, सोतीगंज, लिसाड़ी गेट, लिसाड़ी रोड, शास्त्रीनगर, जागृति विहार, जेलचुंगी आदि इलाकों में बने ढलावघरों की भी है। यहां भी पड़ा कूड़ा सड़ रहा है। ढलावघर के सामने से जाने वाले लोग मुंह पर रुमाल रखकर निगम कर्मियों को कोसते हुए निकल रहे हैं।
बढ़ गया बीमारियों का खतरा
पूरे शहर में कूड़े का अंबार लगा होने से बीमारी का खतरा भी पैदा हो गया है। कूड़ा ढलावघर के बाहर सड़क तक आ गया है। अगर इसका जल्दी से इसका समाधान नहीं हुआ तो बारिश में सड़ता कूड़ा लोगों को बीमारी बाटने लगेगा। बरसात में पहले ही तमाम तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
खामोश है जनप्रतिनिधि और अधिकारी
पिछले सात दिन से शहर में कूड़े को लेकर हाहाकार मचा हुआ है लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इसकी सुध नहीं है। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए अभियान चलाने वाले नेता भी खामोश बैठे हुए हैं। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की शुरूआत करना भी कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। घरों से निकलने वाले कूड़े को डंप करने का कोई इंतजाम नहीं हो पा रहा है। बुधवार को डोर टू डोर योजना के कार्यक्रम में भी पार्षदों ने कूड़े का इंतजाम करने के लिए हंगामा काटा था। कार्यक्रम में सांसद राजेंद्र अग्रवाल, महापौर सुनीता वर्मा, बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के अलावा नगर आयुक्त मनोज चौहान और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ कुंवरसैन भी मौजूद थे। इन सभी ने पार्षदों के हंगामे के बाद भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई। पूरा अमला जल्द ही मामले का समाधान निकाले जाने की बात को कह रहा है लेकिन सफलता मिलती दिखाई नहीं दे रही है।