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मेरठी किस्सा: जब कैलाश प्रकाश ने जेल की अंधेरी कोठरी में पढ़ाई करके प्राप्त किया स्वर्ण पदक

Wed, 03 Oct 2018 05:10 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कैलाश प्रकाश
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मेरठ के स्वाधीनता संग्राम सेनानी कैलाश प्रकाश एक तरफ जहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गांधी जी के साथ आंदोलन में सक्रिय थे, तो दूसरी तरफ अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए थे। 1942 में जब आंदोलन तेज हुआ तो कैलाश प्रकाश ने अपने साथियों के साथ सक्रियता तेज कर दी। उस समय कैलाश प्रकाश बीएससी उत्तीर्ण कर चुके थे। आंदोलन के दौरान कैलाश प्रकाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। जेल में उन्हें तमाम यातनाएं दी गईं और अंधेरी कोठरी में डाल दिया गया। 

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उस दौरान अंग्रेज जेलर जो कैलाश प्रकाश से काफी प्रभावित था, उसने उनसे पढ़ाई के बारे में पूछा। जिस पर कैलाश प्रकाश ने कहा कि वह पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। लेकिन जेल में होने के कारण पढ़ाई अधूरी रह गयी। इस पर जेलर के प्रयासों से उनका एमएससी में प्रवेश करा दिया गया। 

जेल में रह कर कैलाश प्रकाश ने अपनी पढ़ाई की। लेकिन अंधेरी कोठरी में सिर्फ एक डिबिया की रोशनी में लगातार पढ़ने से उनकी आंखों की रोशनी बहुत कमजोर हो गईं। इस बीच जब परीक्षाएं हुईं तो आंखों से पूरी तरह दिखाई न देने के कारण उन्हें लिखने के लिए सहायक दे दिया गया। इस सहायक लेखक की मदद से कैलाश प्रकाश ने परीक्षा दी और आगरा विश्वविद्यालय टॉप कर उस समय स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
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डॉ. कैलाश प्रकाश मेरठ के कस्बे परीक्षितगढ़ से निकलकर बाद में प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। वित्त और शिक्षा मंत्री रहते उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय जिसका वर्तमान नाम चौधरी चरण सिंह विवि कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज और स्पोर्ट्स स्टेडियम बनवाया बाद में जिसका नाम बदलकर कैलाश प्रकाश स्टेडियम रखा गया।
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