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सावधान : मत करना कभी ऐसी भूल, हो जाएगी जिंदगी तबाह

Mon, 03 Apr 2017 02:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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जरा सी भूल से परिवार तबाह हो रहे हैं। जिले में लगातार एचआईवी पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। बड़ों की नासमझी के कारण मासूम बच्चे भी इस लाइलाज बीमारी की चपेट में हैं। उनके चेहरे से बचपन की मुस्कान छिन गई है। वे हर पल मरने को मजबूर हैं। लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर ऐसे ही सैकड़ों मरीजों का इलाज चल रहा है।
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जिले में पिछले साल 16000 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। इनमें से 328 मरीजों में एचआईवी वायरस की पुष्टि हुई। इस साल जनवरी में 29 और फरवरी में 22 मरीजों की पुष्टि हुई। जनवरी में 2047 सैंपल लिए गए, जबकि फरवरी में 1202 सैंपलों की जांच की गई। इलाज करा रहे मरीजों के बारे में जानेंगे तो कई तथ्य चौंकाने वाले सामने आए। नासमझी के कारण इन्होंने अपने पूरे परिवार को अंधेरे में धकेल दिया। कई दंपति एक-दूसरे पर आरोप भी लगा रहे हैं। उनके घर में कलह ने जन्म ले लिया है। इस विवाद को कम करने के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की तरफ से एआरटी सेंटर पर चिकित्सा सुविधा के साथ काउंसिलिंग की सुविधा भी दी जाती है।

21 साल की उम्र में लग गई बीमारी
मुजफ्फरनगर निवासी परिवार ने 20 साल के इकलौते बेटे को मेरठ पढ़ाई के लिए भेजा। एक साल तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में युवक की तबीयत बिगड़ने लगी। थोड़े दिनों में बुखार आना शुरू हो गया। दो- चार महीने इलाज चला, लेकिन ज्यादा आराम नहीं लगा। चिकित्सक ने जांच कराई तो उसमें एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। इलाज के लिए युवक को सरकारी सेंटर भेजा गया। युवक ने इस बीमारी के बारे में परिवार वालों को नहीं बताया। तीन साल बाद परिजनों ने शादी तय कर दी। फिर भी युवक ने मना नहीं किया। अब पत्नी को भी यह बीमारी लग गई है।
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एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप
मीनाक्षी (काल्पनिक नाम) का वैवाहिक जीवन खुशहाली से चल रहा था। परिवार में एक बेटा और अच्छा खासा बिजनेस था। पति ने नया बिजनेस शुरू किया। लग्जरी दफ्तर खोला। इसमें युवक एवं युवतियों को नौकरी दी गई। पत्नी घर संभाल रही थीं। कुछ दिन बाद दंपति ने दूसरे बच्चे की प्लानिंग की। जब मीनाक्षी गर्भवती थी तो डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट कराया। जांच में पता चला कि शरीर में एचआईवी वायरस एक्टिव है। उसके बाद पति ने जांच कराई तो उसे भी एचआईवी वायरस पाया गया। बेटे की जांच कराई तो उसमें भी वायरस पाया गया। अब दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

एचआईवी को रोकने के लिए व्यापक पैमाने पर जागरूकता लाने की जरूरत है। इससे दो फायदे होंगे। एक तो बीमारी पर अंकुश लगेगा, दूसरे परिवार में होने वाले विवाद भी रोके जा सकेंगे। दंपति की काउंसिलिंग जरूरी है। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक, मेडिकल कॉलेज
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