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जिपं. अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास का बिगुल

Tue, 28 Mar 2017 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा की सरकार आने पर सपा को पहला बड़ा झटका लगने जा रहा है। सोमवार को जिला पंचायत के 34 सदस्यों में से 19 सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग कर दी। जिलाधिकारी को शपथ पत्र सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज करने और प्रशासनिक बोर्ड नियुक्त करने की भी मांग रखी।
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लगातार बन रहे समीकरणों के बीच जिपं. अध्यक्ष सीमा प्रधान की कुर्सी हिलनी शुरू हो गयी थी। 11 मार्च को जहां भाजपा को प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिला तो जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ सदस्यों ने लामबंदी शुरू कर दी थी। जिसका परिणाम सोमवार को सामने आ गया। अविश्वास प्रस्ताव के लिए जरूरी 18 सदस्याें के सापेक्ष 19 सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष में अविश्वास जताते हुए पद से हटाने की मांग करते हुए शपथ पत्र जिलाधिकारी बी. चंद्रकला को सौंप दिए। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, मुखिया गुर्जर, हरीश चौधरी, इंद्रपाल बजरंगी, सपा नेता ठा. विनोद आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इन सदस्यों ने सौंपे शपथ पत्र  
सीमा प्रधान के खिलाफ अविश्वास की मांग करने वाले जिला पंचायत सदस्यों में वार्ड एक से कुलविंदर सिंह, वार्ड चार से बबीता भड़ाना, वार्ड तीन से नितिन खटीक, वार्ड छह से मुकेश चरला, वार्ड सात से ललित चौहान, वार्ड आठ से हेमा, वार्ड 10 से बबीता, वार्ड 11 से रजनी सोम, वार्ड 14 से सपना हुड्डा, वार्ड 15 से डॉ. मीनाक्षी भराला, वार्ड 22 से शमशाद, वार्ड 24 से सतपाल सिंह, वार्ड 25 से कृष्णा देवी, वार्ड 26 से तरुण कुमार विक्की तनेजा, वार्ड 27 से शाहिबे आलम उर्फ डब्बू, वार्ड 28 से जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू, वार्ड 29 से अनुज वाल्मीकि, वार्ड 33 से रोहताश पहलवान और वार्ड 34 से दिलशाद सठला शामिल हैं।
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इन लोगों ने बदला पाला
सीमा प्रधान को अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होते समय 18 सदस्यों के वोट मिले थे। जबकि अब अविश्वास पर 19 सदस्यों ने हस्ताक्षर किये हैं। ऐसे में बबीता भड़ाना, साहिबे आलम उर्फ डब्बू और शमशाद पाला बदलकर अब विपक्षी खेमे में आ गए हैं।

कई दिनों से चल रही थी मशक्कत
इस अविश्वास की कवायद करीब 15 दिन से लगातार चल रही थी। जिसमें पर्दे के पीछे सरधना विधायक ठा. संगीत सोम और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह पूरी तरह सक्रिय थे। दोनों ही नेता अपनी पुरानी अदावत का बदला चुकाने के लिए लगातार भाजपा सदस्यों के साथ विपक्षी सदस्यों से भी संपर्क साधे हुए थे। सूत्राें की मानें तो ठा. संगीत सोम के पास कुल 23 सदस्यों ने अविश्वास की मांग के शपथपत्र पर हस्ताक्षर के लिए हामी भर दी थी। लेकिन विपक्षी दलों का होने के कारण उन्हें बेपर्दा न होने और अविश्वास के लिए जरूरी पूर्ण बहुमत मिलने के बाद विधायक संगीत सोम ने इन सदस्यों के शपथ पत्र तैयार नहीं कराये।

शाहिद मंजूर ने भी निकाली कसक
सपा सूत्रों की मानें तो इस अविश्वास के पीछे एक बड़ी सोच पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर की भी रही है। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा के आवास पर जिला पंचायत अध्यक्ष के पति सपा नेता अतुल प्रधान ने जो अमर्यादित व्यवहार किया था, उसे शाहिद मंजूर भूल नहीं पाये हैं। ऐसे में इस अविश्वास के लिए विपक्षी सदस्यों को बांधने के पीछे उनकी रजामंदी होने की बात सपाई खेमा कर रहा है। यही नहीं अविश्वास प्रस्ताव पर सपा की रजनी सोम और दिलशाद सठला के हस्ताक्षर होना इतने मायने नहीं रखता, जितने मायने शाहिद मंजूर के सबसे खास साहिबे आलम उर्फ डब्बू के हस्ताक्षर हैं। डब्बू के अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर होने से स्पष्ट है कि शाहिद मंजूर ने अप्रत्यक्ष रूप से अतुल प्रधान को बदला लेने का संदेश दे दिया है।   

अतुल को मिलती रही पल-पल की खबर  
अविश्वास प्रस्ताव पर भले ही 19 सदस्यों ने हस्ताक्षर किये हों, लेकिन इनमें कुछ ऐसे भी रहे, जो अतुल खेमे से जुड़े सदस्यों के सीधे संपर्क में रहे। जिस दौरान डीएम को शपथपत्र सौंपे गये, तुरंत ही वहां का फोटो अतुल समर्थक सदस्यों को भेज दिया गया। यही नहीं अतुल प्रधान ने भी कुछ सदस्यों को फोन मिलाकर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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