सपा में मचे सियासी घमासान की चपेट में मेरठ की जिला पंचायत भी आ गई है। केसरगंज स्थित सरकारी स्कूल परिसर में जिला पंचायत द्वारा प्रस्तावित व्यावसायिक और आवासीय निर्माण को लेकर हुई शिकायतों पर कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने रिपोर्ट तलब की है। हालांकि, पूर्व जिलाधिकारी पहले ही इस निर्माण पर रोक लगा चुके हैं। लेकिन, शिवपाल के पत्र के बाद अब यह मामला हाई प्रोफाइल हो चला है।
जिला पंचायत बोर्ड की मई में हुई बैठक में केसरगंज और नौचंदी मैदान के पास स्थित जमीन पर व्यावसायिक और आवासीय निर्माण के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इन पर काम भी शुरू कर दिया गया था। लेकिन, जमीन के मालिकाना हक को लेकर हुई शिकायतों के बाद तत्कालीन डीएम पंकज यादव ने 30 जून को इन निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए इसकी जांच एडीएम-एफआर गौरव वर्मा को सौंप दी थी।
इस बीच, खुद को शहर विधानसभा क्षेत्र का बताने वाले लोगों ने कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव को शिकायत भेज दी। इसमें कहा कि केसरगंज में जहां निर्माण कराया जा रहा है, वहां सरकारी स्कूल है। ऐसे में भविष्य में होने वाली गतिविधियों से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस पत्र पर कैबिनेट मंत्री के विशेष कार्याधिकारी ने डीएम से रिपोर्ट तलब की। इसके बाद डीएम ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी से रिपोर्ट मांग ली।
एएमए ने भेजा जिला पंचायत का पक्ष
इस मामले में अपर मुख्य अधिकारी प्रदीप कुमार ने जिला पंचायत का पक्ष भेज दिया है। इसमें कहा गया है कि उक्त निर्माण का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में प्रस्तावित हुआ था और इस स्थान पर जो स्कूल भवन है, वह बहुत ही जर्जर है। ऐसे में व्यावसायिक और आवासीय निर्माण से होने वाली आय से इस स्कूल भवन का निर्माण भी कराया जाना प्रस्तावित है। इससे किसी भी बच्चे के भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा इस जमीन पर लोग अनधिकृत रूप से कब्जा कर रहे थे। निर्माण होने से जहां कब्जा रुकेगा, वहीं जिला पंचायत की आय भी बढ़ेगी।