जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की राजनीति अब फिर गरमा गयी है। शनिवार को जैसे ही प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती नजर आयी तो पहला सवाल जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर मेरठ देहात की राजनीति में गूंजने लगा। सरधना विधायक ठा. संगीत सोम और सपा नेता अतुल प्रधान की अदावत में यह मुद्दा और ज्यादा उठ रहा है। सवाल ये है कि सरधना से अतुल जीत तो हासिल नहीं कर पाए। लेकिन क्या अब उनकी पत्नी की जिला पंचायत की कुर्सी को भी खतरा होगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सरधना विधायक ठा. संगीत सोम ने अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। लेकिन दो वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी कुलविंदर सिंह चुनाव हार गये थे। इसके बाद अतुल प्रधान ने जिला पंचायत निधि से सरधना विधानसभा क्षेत्र में ही अधिकतम काम कराये। इस विकास कार्य के कारण चुनाव में उन्होंने जहां संगीत सोम को चुनौती दी तो सीधे मुख्यमंत्री के खास होने का लाभ उठाते हुए पुलिस-प्रशासन पर भी दबाव बनाते हुए संगीत सोम के लिए चुनौती बने रहे।
दोनाें के बीच यह राजनीतिक वर्चस्व की जंग इन दिनों व्यक्तिगत रंजिश जैसी बन गयी थी। ऐसे में ठा. संगीत सोम की दोबारा जीत और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिला पंचायत की राजनीति भी गरमा गयी है। अब सवाल यह उठता है कि भाजपा की तरफ से जिला पंचायत अध्यक्ष का दावेदार कौन होगा। क्योंकि एक तरफ जहां कुलविंदर सिंह पहले चुनाव लड़ चुके हैं, तो एक खेमा नैतिकता के तौर पर उन्हें ही दोबारा चुनाव लड़ाने की वकालत कर रहा है। लेकिन विधानसभा चुनाव से ऐन पहले कुलविंदर सिंह के पिता मुखिया गुर्जर के संगीत सोम पर आरोप लगाते हुए पार्टी हाईकमान को भेजे पत्र ने खलबली मचा दी थी। इसके बाद संगीत सोम की कुलविंदर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पसंद होंगे, इसमें संशय है।
ऐसे में भाजपा की तरफ से लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य चुनी गयी और सिवालखास से मजबूत दावेदारी कर रहीं डॉ. मीनाक्षी भराला जहां विकल्प हो सकती हैं, तो रोहताश पहलवान भी विकल्प हो सकते हैं। लेकिन डॉ. मीनाक्षी भराला को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव लड़ने से पहले पार्टी की गुटबाजी से पार पाना होगा, क्योंकि उनके खिलाफ भी लामबंदी है। ऐसे में कोई नया नाम भी जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए सामने आ सकता है।