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जेब भरने के लिए हाउस टैक्स में खेल

Wed, 06 Jul 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग द्वारा लोगोें को भेजा जा रहा अनाप शनाप बिल अधिकारियों की कमाई का जरिया बना हुआ है। पहले ज्यादा बिल भेजकर भवन मालिक को परेशान किया जाता और उसके बाद अपनी जेब गर्म करने के लिए अधिकारी भवन का वार्षिक मूल्यांकन और हाउस टैक्स भी कम कर रहे हैं। इससे नगर निगम को लाखों रुपये का चूना लग रहा है। ऐसे ही कई मामलों के हाउस टैक्स बिल और दस्तावेज अमर उजाला के पास हैं। जो विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की पोल खोल रहे हैं।
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केस नं. 1
नगर निगम के वार्ड-51 में रिषिका का मकान नंबर 314 है। हाउस टैक्स विभाग द्वारा अक्तूबर 2014 तक इन्हें भेजे गए बिलों में भवन का वार्षिक मूल्यांकन 1,48,464 रुपये, हाउस टैक्स 18,558 रुपये और शुद्ध देय बकाया 2,03,811 रुपये है। इसके बाद धारा 506 का नोटिस भेजकर हाउस टैक्स जमा करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने खेल करते हुए दिसंबर 2014 में भवन स्वामी का नाम परिवर्तित करते हुए पृथ्वी का नाम दर्ज कर दिया। वहीं भवन का वार्षिक मूल्यांकन घटाकर 4770 रुपये, हाउस टैक्स 596 रुपये और शुद्ध देय बकाया 1848 रुपये कर दिया। इसके बाद  20 जुलाई 2015 को एक ओर बिल जारी कर शुद्ध बकाया घटाकर 782 रुपये कर दिया।

केस नं. 2
नगर निगम वार्ड-51 में अजय कुमार के नाम से 437/1 नं.  भवन है। नगर निगम ने 31 मार्च 2015 को इनके पास हाउस टैक्स का बिल भेजा। इसमें भवन का वार्षिक मूल्यांकन 1,03,848 रुपये और हाउस टैक्स 12981 और शुद्ध देय 40,874 रुपये दर्शाया है। निगम की तरफ से भवन स्वामी को इसी दिन धारा 506 का नोटिस जारी कर 50,548 रुपये जमा करने के निर्देश दिए। नोटिस के बाद भवन स्वामी ने जैसे ही हाउस टैक्स अधिकारियों से संपर्क किया तो 30 जून 2015 को नया बिल जारी कर दिया गया। इसमें जहां वार्षिक मूल्यांकन 2700 रुपये, हाउस टैक्स 337.50 और शुद्ध देय 442.80 रुपये कर दिया।
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केस नं. 3
वार्ड-51 में 2015 तक भवन नंबर 217 आदेश जैन के नाम था। नगर निगम द्वारा 2013 से जून 2015 तक भेजे गए हाउस टैक्स बिल पर गौर करें तो वार्षिक मूल्यांकन 49,000 हजार, हाउस टैक्स 6,125 रुपये और शुद्ध देय 45403 रुपये है। अधिकारियों ने खेल करते हुए नवंबर 2015 में इसी भवन पर मदनलाल का नाम दर्ज करके हाउस टैक्स बिल जारी कर दिया। इस बार वार्षिक मूल्यांकन 2900 रुपये, हाउस टैक्स 362 रुपये और शुद्ध देय 475 रुपये कर दिया।

केस नं. 4
वार्ड-51 में भवन संख्या 130-1 मयंक जैन के नाम है। अधिकारियों द्वारा सितंबर 2015 में भेजे गए हाउस टैक्स बिल में वार्षिक मूल्यांकन 16,170 रुपये, हाउस टैक्स 2021 रुपये और शुद्ध देय बिल 2651.88 रुपये है। अधिकारियों ने फिर खेल किया और भवन स्वामी को बैक डेट (मई 2015) में धारा 506 का नोटिस भेजकर धनराशि बढ़ा दी। इसमें 1,15,234 रुपये जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। फरवरी 2016 में नया हाउस टैक्स बिल जारी करके जहां वार्षिक मूल्यांकन 16,170 रुपये के स्थान पर बढ़ाकर 2,36,740 रुपये, हाउस टैक्स 29,592 रुपये और शुद्ध देय बिल 1,54,607 रुपये कर दिया।

बिलों में गड़बड़ी कर बनाते हैं हथियार
मेरठ। अमर उजाला के पास ऐसे काफी हाउस टैक्स बिल हैं जिनमें नगर निगम हाउस टैक्स विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने खेल किया है। इनसे साफ जाहिर हो गया है कि अधिकारियों ने इसको निजी कमाई का हथियार बनाया हुआ है।

सवाल ये भी
हाउस टैक्स बिलों में अलग-अलग वार्षिक मूल्यांकन और हाउस टैक्स दर्शाए जाना कहीं न कहीं गड़बड़झाले की ओर इशारा कर रहा है। अब सवाल है कि यदि पहले बिल ठीक तो फिर दोबारा क्यों जारी किए गए। दोबारा बिल जारी करना अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम है और जनता का उत्पीड़न करना है। इन सभी सवालों में निगम हाउस टैक्स के अधिकारी घिरे हैँ
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