भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन तय हो चुका है, अब केवल औपचारिक घोषणा होनी बाकी है। जयंत का गठबंधन का यह दांव दादा चौधरी चरण सिंह और पिता चौधरी अजित सिंह की राजनीतिक विरासत वापस लेने में अहम होगा। भाजपा के साथ गठबंधन होने के बाद रालोद के लिए बागपत सीट सबसे सुरक्षित मानी जा रही है।
बागपत लोकसभा सीट पर वर्ष 1998 को छोड़कर लगातार चौधरी चरण सिंह परिवार का कब्जा रहा है। वर्ष 1977 में चौधरी चरण सिंह पहली बार यहां से लोकसभा चुनाव लड़कर जीत दर्ज करते रहे। उनके बाद वर्ष 1989 में उनके बेटे चौधरी अजित सिंह ने यहां से जीत दर्ज की तो वह 1997 तक सांसद रहे। वर्ष 1998 में जरूर उलटफेर हुआ और सोमपाल शास्त्री ने उनको हरा दिया। इसके बावजूद वह ज्यादा समय तक सांसद नहीं रह सके और वर्ष 1999 में हुए चुनाव में चौधरी अजित सिंह ने फिर जीत दर्ज करते हुए लगातार कब्जा जमाए रखा।