स्वास्थ्य विभाग में जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों को भुगतान कराने में बड़ा खेल सामने आ रहा है। लाभार्थियों के नाम पर एक ही महिला का साल में तीन बार प्रसव दिखा दिया गया। यही नहीं, आशाओं को भी बिना किसी वेरिफिकेशन के पेमेंट जारी कर दिया गया। अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग के उन पूर्व अफसरों के गले की फांस बन रहा है, जिन्होंने ऑडिट में आपत्ति के बाद भी गलत तरीके से हो रहा भुगतान नहीं रोका। अब इन योजनाओं में हुए घोटाले की विजिलेंस जांच कराने की तैयारी है। इससे पूर्व सीएमओ डॉ. अमीर सिंह और डॉ. रमेश चंद्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
तीन वित्तीय वर्षों के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला हुआ है। यह सीधे तौर पर जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा योजना से जुड़ा है। इसमें से करीब 30 लाख का घोटाला जननी सुरक्षा योजना में हुआ है। दोनों योजनाओं में कुल मिलाकर 75 लाख से अधिक का घोटाला अकेले डॉ. रमेश चंद्रा के कार्यकाल में हुआ है। अब शासन इस घोटाले की विस्तृत जांच करा रहा है। साथ ही दो पूर्व सीएमओ और दो पूर्व एसीएमओ आरसीएच के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी है। वहीं, कुछ सीएचसी प्रभारी और अन्य चिकित्सक भी जांच के घेरे में हैं।
योजना में ऐसे किया गया खेल
विशेष ऑडिट रिपोर्ट और उससे पहले रूटीन ऑडिट की ऑब्जेक्शन रिपोर्ट बता रही है कि जननी सुरक्षा योजना में संस्थागत प्रसव कराने पर होने वाले पेमेंट में भारी खेल किया गया है। रूटीन ऑडिट में आशा और लाभार्थी (जच्चा) को भुगतान से पहले वेरिफिकेशन करने को कहा गया। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग ने कोई वेरिफिकेशन नहीं किया। साथ ही ऑडिट के दौरान कुछ खाते ऐसे पाए गए, जिनमें एक साल में तीन बार लाभार्थी के तौर पर भुगतान किया गया। कुछ खातों के नंबर अलग थे, तो भुगतान से पहले लगाए गए डॉक्यूमेंट्स से पता चला कि वो लाभार्थी के ही परिवार का था या फिर उसने पता बदलकर खाता खुलवाया था। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ बिना वेरिफिकेशन के चलता रहा है।
नहीं कराया भौतिक सत्यापन
स्वास्थ्य विभाग में आशा व जच्चा को भुगतान होने का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। जबकि बीते वर्षों के दौरान हुए रुटीन ऑडिट में भी इसके लेकर ऑब्जेक्शन जताया गया था। गौरतलब है कि जननी सुरक्षा योजना में ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे को जन्म देने वाले महिला को संस्थागत प्रसव पर 1400 रुपये व आशा को 600 रुपये दिए गए। जबकि शहरी क्षेत्र में यह धनराशि 1000 और 400 रुपये हो जाती है।
अब विजिलेंस जांच की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार जननी सुरक्षा योजना व अन्य योजनाओं में हुए घोटालों की विजिलेंस जांच कराने की तैयारी है। शासन चार अफसरों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दे चुका है। अब विजिलेंस जांच की फाइल तैयार है। जो जल्द ही मुख्य सचिव के सामने रखी जानी है। अगर आगे की जांच होती है तो सीएचसी, मेडिकल व जिला महिला चिकित्सालय के अलावा सीएमओ दफ्तर के कुछ लोग भी उसके दायरे में होंगे। क्योंकि जननी सुरक्षा योजना का भुगतान जिले में 14 केंद्रों से किया जाता है, जिसमें 12 सीएचसी, मेडिकल कॉलेज व जिला महिला चिकित्सालय शामिल हैं।