बाबा औघड़नाथ मंदिर में शुक्रवार रात 10 बजते ही चतुर्दशी का जलाभिषेक करने के लिए सैलाब उमड़ पड़ा। ऐसी आपाधापी मची कि आधा दर्जन कांवड़िये भीड़ में दब गए, जिन्हें सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताओं ने निकाला। इस दौरान तमाम व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं और सब कुछ महादेव के सहारे ही चला।
चतुर्दशी का जलाभिषेक रात 9:50 बजे शुरू होना था। इससे पहले ही लाखों शिवभक्तों की भीड़ चारों तरफ जमा हो चुकी थी। 10 बजते-बजते बम-बम भोले के उद्घोष के साथ भारी भीड़ लाइन तोड़कर तेजी के साथ मंदिर परिसर की तरफ बढ़ी। जिसके बाद ऐसी आपाधापी मची कि प्रवेश द्वार पर लगाई गईं बैरीकेडिंग और अन्य व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। इस दौरान कुछ कांवड़ियों ने लाइन तोड़कर अंदर घुसने का प्रयास किया तो उनकी सिविल डिफेंस कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों द्वारा रोकने का प्रयास करने पर बहस हो गई। कांवड़ियों ने हंगामा करना शुरू किया तो पुलिसकर्मी भी पीछे हट गए। इसके बाद महादेव के भरोसे ही भारी भीड़ के बीच जलाभिषेक होता रहा।
103 साल की फूलवती भी लाईं कांवड़
मेरठ। आस्था के आगे उम्र भी आडे़ नहीं आई। 103 साल की फूलवती इसका उदाहरण हैं। शहर के ज्वाला नगर निवासी फूलवती अपने परिजनों के साथ हरिद्वार से कांवड़ लाकर रात 11 बजे बाबा औघड़नाथ मंदिर जलाभिषेक को पहुंचीं। उनकी आस्था देख हर कोई हैरान था। उन्होंने बताया कि वह परिवार की सुख शांति और तरक्की के लिए कांवड़ लाई हैं। उम्मीद है कि भोलेनाथ उनकी मनोकामना जरूर पूरी करेंगे।