सेना की पाइन डिविजन ने बृहस्पतिवार को जेसोर डे पर जेसोर की जीत के जांबाजों को नमन किया। पाकिस्तान के साथ 1971 की जंग में जेसोर पर भारतीय सेना के कब्जे ने फतह की पटकथा लिख दी थी। सैनिकों के अद्भुत साहस के कारण सेना के कदम विपरीत परिस्थिति में भी ठहरे नहीं। सिविलियन से दुश्मन की बर्बरता सुनकर सैनिकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। वह दुश्मन को नेस्तनाबूद करने के लिए उतावले थे। जीत में पाइन डिविजन की अहम भूमिका रही। जंग के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। सैनिक बैंड ने देशभक्ति की धुन बजाई। वीरता की गाथा को याद किया गया।
मेरठ कैंट में तैनात सेना की पाइन डिवीजन के जांबाजों ने सात दिसंबर को जेसोर (बांग्लादेश) फतह किया था। सैन्य दृष्टि से पाकिस्तानी सेना को भगाने और हराने में जेसोर पर कब्जा जरूरी था। इसके बिनाढाका की राह आसान नहीं थी। जेसोर की वर्षगांठ पर पाइन वॉर मेमोरियल में डिवीजन के जांबाजों ने युद्ध की गौरवगाथा को साझा करते हुए शहीदों को नमन किया। एक तरफ सैनिकों की वीर गाथाओं क ो सैन्य बैंड नमन कर रहा था, तो दूसरी ओर शहीदों को सशस्त्र सलामी दी गई। गौरवशाली बलिदानी परंपरा समेटे हुए पाइन डिवीजन के सेवानिवृत्त अपने परिवारों के साथ अहम पलों को बांट रहे थे। जंग के जांबाज रिटायर ब्रिगेडियर रणवीर सिंह के मुताबिक पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर वहां की सरकार जुल्म करती थी। हिंदुस्तानी फौज ने इनका सहयोग किया। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध हमारे वीरों की बहादुरी की वो अमिट स्मृति है, जिसकी दूसरी मिसाल दुनिया में कहीं नहीं मिलती। यह भारतीय फौज ही थी जिसने बांग्लादेश की आजादी की राह खोली। ढाका में पाकिस्तानी सेना के जनरल को 93 हजार युद्धबंदियों के साथ घुटने टेकने पड़े।
पुरानी यादें हुई ताजा
जेसोर डे पर पुरानी यादें ताजा हो गईं। युद्ध के मैदान में दुश्मन पर फतह के लिए घायल हुए सैनिक बृहस्पतिवार को दोस्तों के साथ इस आयोजन का हिस्सा बने। पाइन डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल अतुल्य सोलंकी ने सभी पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को आमंत्रित किया था। साथ ही शहीदों के परिवार के सदस्य भी आयोजन में शामिल हुए। शहीदों के बलिदान को याद करते हुए अफसरों ने पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया। पाइन डिवीजन में कमांडर रहे सेना मेडल प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल बीएस सहरावत, परम विशिष्ट सेवा मेडल और अतिविशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त मेजर जनरल वाईके वडेरा, मेजर जनरल रणवीर सिंह, मेजर जनरल अनिल सप्रा विशिष्ट सेवा मेडल, कीर्ति चक्र विजेता मेजर जनरल हरदेव सिंह, मेजर जनरल पितरे, मेजर जनरल एसके शर्मा ने शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित किए।
पाकिस्तानी सेना को दिया था मुंहतोड़ जवाब
तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांग्लादेश में स्थित जेसोर सेना का एक बड़ा केंद्र रहा है। भारतीय फौज की पाइन डिवीजन ने पांच व छह दिसंबर 1971 की जंग के बाद जेसोर को अपने कब्जे में ले लिया था। मुकम्मल जीत सात दिसंबर को हुई। इस हार के बाद पाकिस्तानी सैनिकों को मजबूरन घुटने टेकने पड़े। जेसोर के इस युद्ध में 81 पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के अलावा 130 जेसीओ, 3476 जवानों ने समर्पण किया था। इसी का नतीजा था कि वेस्टर्न सेक्टर में ढाका फतह के दौरान पाकिस्तान के 93000 सैनिकों को बंधक बनाया था। पाक की 107 ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर हयात खान ने जेसोर कंटोनमेंट के समर्पण का पत्र मेजर जनरल दलबीर सिंह को खुलना गेस्ट हाउस में साइन किया था।
पाइन डिविजन ने दिखाया अद्भुत साहस
जेसोर में दुश्मन की फौज पर फतह का लक्ष्य 9 डिवीजन (पाइन डिविजन) को दिया गया था। मेजर जनरल एसएस अहलावत के मुताबिक बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए नवंबर 1971 के अंतिम दिनों में भारतीय सेना के जांबाजों ने जेसोर की ओर कूच किया। तब 21 व 22 नवंबर को सेना की 9वीं डिविजन ने महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। इससे युद्ध बदल गया। चार-पांच दिसंबर को भारतीय फौज की पाकिस्तानी सेना से आमने-सामने जंग हुई। इस जंग में भारतीय सेना की 9वीं डिवीजन ने पाकिस्तानी फौज क े हौसले पस्त कर दिए। जेसोर पर कब्जे के बाद भारतीय सेना खुलना की ओर बढ़ गई। 9 डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल दलबीर सिंह के नेतृत्व में वहां भी सेना ने विजय पताका फहराया।