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जांच से पहले ही पुलिस को क्लीन चिट की तैयारी

Thu, 26 May 2016 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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परीक्षितगढ़ में अहसान की मौत पर जांच में क्लीन चिट - फोटो : अमर उजाला
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 थाना परिसर में घायल अहसान की मौत के मामले में घिरी पुलिस को जांच से पहले ही क्लीन चिट देने की तैयारी है। जांच अधिकारी एसपी देहात का कहना है कि प्रथम दृष्टया इस केस में पुलिस की कोई गलती नहीं लग रही। बाकी जांच के बाद कहा जाएगा।
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थाने में अहसान की मौत होने की सूचना पर एसपी देहात डॉ. प्रवीण रंजन मंगलवार रात करीब नौ बजे थाने पहुंचे थे। उन्होंने घटना की सच्चाई जानने के लिए सीओ मवाना अब्दुल कादिर के साथ थाने की जीडी और अन्य कागजातों की जांच की।
थानाध्यक्ष समेत थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों से जानकारी ली। बुधवार को एसपी देहात ने बताया कि इस घटना की वह खुद जांच कर रहे हैं। अभी तक पड़ताल में पता चला है कि मंगलवार को दिन में मारपीट की घटना होने के बाद परिजन घायल को लेकर किसी प्राइवेट डॉक्टर के यहां गए थे। बाद में मवाना के सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहां से पुलिस की चिट्ठी लाने की बात कही गई। इसके बाद वह परीक्षितगढ़ थाने पहुंचे। ऐसे में घटना के घंटो बाद वे थाने पहुंचे।
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बकौल एसपी देहात, पीड़ित की शिकायत पर थाने में लिखापढ़ी कर कागजात तैयार करने में करीब आधा घंटा  लगा। इसी बीच घायल की हालत खराब होने की जानकारी परिजनों ने दी तो पुलिस कागजात तैयार कर चुकी थी। सीएचसी पहुंचने पर चिकित्सकों ने अहसान को मृत घोषित किया। प्रथम दृष्टया जांच में थाना पुलिस की कोई चूक नहीं सामने आ रही है। हालांकि फिलहाल वे अभी जांच कर रहे हैं।

‘पुलिस कर रही मनमानी’
अहसान के पुत्र वाजिद और साजिद का आरोप है कि थाने में मौजूद मुंशी को उन्होंने पिता की तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया और अहसान को तेज गर्मी में धूप में बैठा दिया गया।
हालत खराब होने पर थाने में ही उनकी मौत हुई है। आरोप है कि पुलिस अपनी मनमानी कर रही है। पुलिस ने अहसान की मौत थाने से अस्पताल ले जाते होना दिखाई है। चार लोगों के खिलाफ पहले मामूली धाराओं में केस दर्ज किया, फिर रात को गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट की जानकारी दी।

अहसान की मौत पर फंसी सीएचसी की गर्दन  
मारपीट में घायल अहसान का इलाज करने से हाथ खड़े करने वाले मवाना सीएचसी के चिकित्सक और स्टाफ की गर्दन जांच में फंस गई है। सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा ने मवाना सीएचसी प्रभारी को नोटिस जारी कर तत्काल स्पष्टीकरण देने को कहा है। जवाब मिलने के बाद संबंधित चिकित्सक और फार्मेसिस्ट पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा का कहना है कि सीएचसी प्रभारी को नोटिस भेजकर पूछा गया है कि आखिरकार घायल अहसान को भर्ती करने या ट्रीटमेंट देने से मना क्यों किया गया। घायल अहसान को किस वक्त सीएचसी लाया गया और उस वक्त सीएचसी पर किसकी ड्यूटी थी। इन तमाम बिंदुओं पर जवाब-तलब किया गया है। सीएमओ के अनुसार लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर शत प्रतिशत कार्रवाई होगी, लेकिन उससे पहले स्पष्टीकरण मांगा जाना जरूरी है।
परीक्षितगढ़ थाना अंतर्गत मिर्जापुर खादर निवासी अहसान को उसके परिजन मंगलवार सुबह गंभीर हालत में मवाना सीएचसी लेकर पहुंचे थे। आरोप हैं कि सीएचसी में तैनात चिकित्सक व फार्मेसिस्ट ने यह कहकर टरका दिया था कि मामला परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र का है।
ऐसे में जब तक पुलिस की रिपोर्ट नहीं आती, ट्रीटमेंट नहीं किया जा सकता है। परिजन अहसान को थाना परीक्षितगढ़ लेकर पहुंचे तो वहां भी करीब दो घंटे तक तड़पने के बाद उसने दम तोड़ दिया था। परिजनों का आरोप है कि अगर अहसान को समय रहते इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। इस प्रकरण में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की चौतरफा आलोचना हो रही है।

बेलगाम हैं स्वास्थ्य केंद्र
सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज न मिलने से अहसान की मौत होना महज एक उदाहरण है। स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना ऐसे ही सैकड़ों मरीजों को टरकाया जाता है। जिले के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर रात में चिकित्सा सुविधा नहीं है, जबकि स्टाफ के रहने के लिए आवास की व्यवस्था तक की गई है।
लेकिन अधिकांश चिकित्सक सरकारी आवासों में नहीं रहते हैं, बल्कि गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर या फिर शहर से अप-डाउन कर रहे हैं। ऐसा इसलिए भी संभव हो पा रहा है, क्योंकि बीते एक साल के दौरान ऊपर से काम हल्का पड़ गया है। क्योंकि ट्रांसफर से लेकर पोस्टिंग सेटिंग के जरिये मनपसंद जगह पर कराई जा रही है और उसमें में भी निरीक्षण महज खानापूर्ति के लिए हो रहे हैं।
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