गोपाल काली को धमकी भरी कॉल की जांच शुरू
मेरठ/ मवाना। भाजपा के पूर्व विधायक गोपाल काली द्वारा धर्मेंद्र पर इंटरनेट के जरिए धमकी दिलाने का अंदेशा जताते हुए थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की जांच साइबर सेल कर रहा है। बताया है कि साइबर सेल ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। इस बीच काली ने एसएसपी से मिलकर थाना प्रभारी की शिकायत की है। आरोप लगाया कि वह उनके राजनीतिक, सामाजिक जीवन व कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल खडे़ कर रहे हैं। सोमवार तक इस प्रकरण में जांचकर कार्रवाई की जाए। ऐसा नहीं होने पर आंबेडकर पार्क में एक दिन के उपवास पर बैठने की चेतावनी दी है।
उन्होंने एसएसपी को बताया कि उन्होंने पूर्व थानाध्यक्ष और हस्तिनापुर नगर पंचायत के चेयरमैन अरुण कुमार के खिलाफ उनके अनैतिक कार्यों और आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। इसलिए दोनों उनसे रंजिश रखते हैं और जानमाल की हानि पहुंचा सकते हैं। उन्हें 2019 में छह माह के लिए गनर दिया गया था, जिसे चार माह बाद बिना जानकारी दिए हटा लिया गया था।
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फार्म हाउस के लिए मिट्टी का काम नहीं रोक पाया वन विभाग
- सेंक्चुअरि क्षेत्र से अवैध खनन कर किया गया दो से तीन फुट तक मिट्टी का भराव
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के भीम कुंड-गंगा पुल पर पूर्व में चले मिट्टी के सरकारी कार्य को रोकने के लिए वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया था, जिससे चांदपुर-बिजनौर को जोड़ने वाले गंगा पुल का कार्य लटक गया था। कई साल बाद वन विभाग की एनओसी मिलने पर कार्य शुरू हुआ था। दूसरी ओर वन विभाग को हस्तिनापुर के निवर्तमान थानाध्यक्ष धर्मेंद्र द्वारा जमीन खरीद कर बनाए गए फार्म हाउस पर मिट्टी का कार्य क्यों नहीं नजर आया, जबकि सेंक्चुअरि क्षेत्र होने के कारण यहां मिट्टी का खनन प्रतिबंधित है। बताया जाता है कि धर्मेंद्र ने अपने आलीशान फार्म हाउस में दो से तीन फुट गहराई को समतल करने के लिए मिट्टी का भराव कराया है और मिट्टी का अवैध खनन सेंक्चुअरि क्षेत्र से ही किया गया है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि प्रतिबंध के बावजूद खेत में मिट्टी का भराव किसकी अनुमति से हुआ?
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किस विभाग की है जमीन, स्थिति स्पष्ट नहीं
धर्मेंद्र द्वारा पांडवान क्षेत्र में पौने दो बीघा जमीन पर फार्म हाउस बनवाया है, उस जमीन की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। वन विभाग के अधिकारी इस जमीन को सेंक्चुअरि क्षेत्र से बाहर को बता रहे हैं, वहीं नगर पंचायत भी फार्म हाउस के अपनी सीमा में न होने की बात कह रही है। पास की ग्राम पंचायत दूधली के ग्राम प्रधान भी जमीन के ग्राम पंचायत में न होने की बात कह रहे हैं। फार्म हाउस के निर्माण की जानकारी वन विभाग, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत या जिला पंचायत किसी के पास नहीं है या फिर इस बड़ी बात को कार्यवाही के डर से छिपाया जा रहा है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मुकेश कुमार मिश्र ने बताया कि धर्मेंद्र का द्रोपदी घाट के समीप फार्म हाउस नगर पंचायत की सीमा से बाहर है।
वहीं ग्राम पंचायत दूधली की प्रधान सुशीला देवी का कहना है राजकीय पशुधन कृषि प्रक्षेत्र की भूमि का कुछ हिस्सा जलालपुर मकबूलपुर में आता है, जो ग्राम पंचायत दूधली में है। फार्म हाउस वाली जगह नगर पंचायत की भी हो सकती है, क्योंकि कुंडा गांव तक नगर पंचायत के बोर्ड लगे हैं।