मेरठ। मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहे स्टूडेंट का कार्य बहिष्कार बुधवार को भी जारी रहा। उनका रुका तीन माह का मेहनताना (स्टाइपेंड) तो आ गया। हालांकि वे 10 साल पहले फिक्स किए गए मेहनताना को रिवाइज करने की मांग पर अड़े हैं। वहीं, मेडिकल और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें मनाने में जुटे रहे मगर बात नहीं बनी। मामला शासन तक पहुंच चुका है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि केजीएमयू के इंटर्न का भी समर्थन मिल रहा है। कोरोना काल में वहां भी कार्य बहिष्कार हो सकता है।
इंटर्न का कहना है कि उनके वेतन में दस सालों से बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई कई गुना बढ़ गई है। मेहनताना 7500 रुपये प्रतिमाह है, जबकि वे आठ से 12 घंटे कार्य कर रहे हैं। ट्राई एरिया, फ्लू ओपीडी, इमरजेंसी, होल्डिंग एरिया, ट्रूनेट मशीन आदि जहां संक्रमण का सबसे ज्यादा रिस्क है, वहां ड्यूटी करते हैं। एक तरफ सरकार कोरोना योद्धा कहती है तो दूसरी तरफ अन्याय कर रही है। उन्होंने बताया कि इससे पहले सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया था। केंद्र शासित संस्थानों में इसी कार्य अवधि के 23,500 दिए जाते हैं। वहीं, दूसरे राज्यों में 30,000 तक दिए जा रहे हैं। कार्य बहिष्कार की जानकारी पाकर सीडीओ ईशा दुहन मेडिकल कॉलेज पहुंचीं और प्राचार्य कार्यालय के बाहर स्टूडेंट्स से बातचीत की। वहीं, प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज बालियान ने बताया कि इंटर्न का तीन माह का मेहनताना आ गया। फिर स्टूडेंट्स प्राचार्य कार्यालय के बाहर से चले गए। हालांकि कुछ देर बाद लौट आए।
मेडिकल में रही अव्यवस्था
इंटर्न के कार्य बहिष्कार से मेडिकल में अव्यवस्था रही। वहीं, इमरजेंसी और ओपीडी में काफी दिक्कत आई। इंटर्नशिप कर रहे 130 मेडिकल स्टूडेंट्स कार्य बहिष्कार पर हैं।
कार्रवाई की चेतावनी दी
प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग की तरफ से इन स्टूडेंट्स को नोटिस दिया गया। इसमें कहा कि सभी इंटर्न की महामारी के मद्देनजर उपस्थिति अनिवार्य है। इनकी अनुपस्थिति अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है। इसलिए सभी इंटर्न ड्यूटी पर उपस्थित हों नहीं तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।