सहारनपुर देवबंद से एटीएस ने कई ऐसे आतंकियों को भी पकड़ा है जो देवबंद में कई साल रहने के बाद जैसे ही यहां से निकले पकड़े गए। अब्दुल्लाह भी जैसे ही देवबंद से जाकर मुजफ्फरनगर पहुंचा, एनआईए द्वारा पकड़ा गया। अमरोहा निवासी सुहेल भी देवबंद में रहने के बाद वहां पहुंचा और पकड़ा गया।
देवबंद में रहने वाले बांग्लादेशी आतंकी संगठन से जड़े तीन लोग भी देवबंद में हो रही छापेमारी से बचने के लिए जैसे ही लखनऊ पहुंचे, चारबाग स्टेशन पर पकड़ लिए गए। यही नहीं दिल्ली से भी दो आतंकियों को पकड़ा गया जो देवबंद में रहते रहे थे। जिनमें से एक को कोलकाता पुलिस पकड़कर ले गई थी। सहारनपुर में जब तक रहे न तो पुलिस को इसकी भनक लग सकी और न ही खुफिया विभाग को ही इनका पता लग सका।
सहारनपुर का खुफिया विभाग सिर्फ धरना, प्रदर्शन करने वालों की जानकारी देने तक ही सिमट कर रह गया है। एटीएस ने पिछले दो साल में 12 लोगों को गिरफ्तार किया। एक को भी स्थानीय खुफिया इकाई के इनपुट पर पुलिस नहीं पकड़ सकी। जिससे सहारनपुर की खुफिया विभाग की पोल खुल गई है। देवबंद से गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के बारे में भी स्थानीय खुफिया इकाई अनजान बनी रही।
जैश के सॉफ्ट टारगेट हैं कश्मीर के युवा
एक साल पूर्व अलीगढ़ से कश्मीरी छात्र लापता हुआ और आतंकी संगठन के संपर्क में आ गया, फिर ग्रेटर नोएडा का छात्र उसी अंदाज में लापता होकर आतंकी बन बैठा। अब देवबंद से जैश ए मोहम्मद के दो सक्रिय सदस्य गिरफ्तार हुए, जो जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं। वह युवाओं को जेहाद के नाम पर बरगलाकर आतंकी संगठन से जोड़ने की कोशिशें कर कर रहे थे।
आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के इस कदम से इतना तो स्पष्ट है कि जम्मू कश्मीर में जिस तरह से सेना ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया और जैश ए मोहम्मद के कमांडरों का सफाया किया, उससे आतंकी संगठन नए कमांडर बनाने में जुट गया है और कश्मीरी युवा ही इस संगठन की निगाह में सॉफ्ट टारगेट हैं।
इसकी वजह यह है कि कश्मीरी युवकों से संपर्क साधने और उनको अपनी बात समझाने में आसानी रहे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जैश-ए-मोहम्मद की सक्रियता से कई खतरे भी भविष्य के लिए पैदा हो रहे हैं। इसके लिए पुलिस और खुफिया विभाग को पहले से ज्यादा चौकन्ना होना पड़ेगा।
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