मेरठ में मेडिकल इलाके के प्रवेश विहार के पास बृहस्पतिवार को काजीपुर के श्मशान घाट पर एक पेड़ पर दरोगा का शव लटका मिला। मुजफ्फरनगर में तैनात दरोगा के जेब में एक सुसाइड नोट भी मिला है। दरोगा का परिवार प्रवेश विहार में रहता है। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में दरोगा ने खुद ही फांसी लगाकर जान दी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजकर इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
जानिए पूरा क्या है मामला
सुसाइड नोट
मुजफ्फरनगर में एसडीएम सदर कोर्ट में तैनात एचसीपी बिजेंद्रर सिंह पुत्र दाता राम 59 वर्ष निवासी अशोक विहार थाना मेडिकल मेरठ ने 1 मार्च को रात्रि में खरखौदा थाना के गांव काजीपुर के श्मशान घाट में खड़े नीम के पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली। मृतक के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार मृतक ने एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर पर शोषण करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव, सुसाइड नोट व अन्य सामान को कब्जे में ले लिया है।
बड़े बेटे का बयान
सुसाइड नोट मिला
बिजेंद्रर सिंह के बड़े बेटे अरविंद कुमार ने बताया कि मेरे पिता जी मुजफ्फरनगर में एसडीएम सदर कोर्ट में दरोगा के पद पर तैनात थे। अरविंद ने बताया कि पिता श्री कल रात आठ बजे के करीब घर आए और पांच मिनट में ही कपड़े पहनकर घर से निकल लिए। उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि अभी आ रहा हूं। अरविंद ने यह भी बताया कि रात 9 बजे के करीब पापा ने मेरे पास फोन किया और कहा कि बेटा मैं ऐसे ही घूमना आया था अभी थोड़ी देर में आ जाएगा। लेकिन इसके बाद जब वो काफी देर तक घर नहीं लौटे तो हमने इधर-उधर ढूंढना शुरु कर दिया। लेकिन जब काफी रात तक नहीं मिले तो हमने मेडिकल थाने में सूचना दी। अरविंद ने कहा कि जब हम सुबह ढूंढने गए तो काजीपुर गांव के श्मशान घाट पर भीड़ लगी हुई थी। पूछा तो बताया कि यहां कोई पेड़ से लटका हुआ है। जब हम पास गए तो पापा को देखकर पैरों तले की जमीन खिसक गई।
परिवार ने एसडीएम पर लगाया आरोप
यूपी पुलिस
मृतक के परिवार का कहना है कि उनके पास से जो सुसाइड नोट मिला है उसमें साफ-साफ लिखा है कि मुजफ्फरनगर एसडीएम सदर (रामअवतार गुप्ता) ने उनपर फाइल गायब करने का सीधा-सीधा आरोप लगाया था जबकि किसी मुल्जिम को जमानत न देने पर उन्होंने खुद फाइल गायब की थी। इसीलिए उन्होंने प्रताड़ित होकर आत्महत्या कर ली।