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नवाचार से होगा कृषि का विकास, तभी किसानों की बढ़ेगी आय : डॉ. त्रिवेणी

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- कृषि विवि के नए कुलपति बोेले, शुरू होंगे नए डिप्लोमा और डिग्री कोर्स
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में रविवार को नए कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने कुलपति का कार्यभार डॉ. केके सिंह से ग्रहण किया। नए कुलपति ने पत्रकार वार्ता में कहा कि नवाचार से ही कृषि का विकास होगा, तभी किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान आईवीआरआई में कुलपति व निदेशक रहे डॉ. त्रिवेणी दत्त ने रविवार को कार्यभार संभाला। डॉ. दत्त आईवीआरआई बरेली में वर्ष 2021 और 22 में निदेशक पद पर नियुक्त हुए थे। पत्रकार वार्ता में कुलसचिव डॉ. रामजी सिंह ने उनके कार्यों का उल्लेख किया। बाद में पत्रकारों से वार्ता में कुलपति ने कहा कि भारतीय कृषि में उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां गन्ना, धान, गेहूं और आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
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डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि विवि में किसान उपयोगी तकनीक का विकास करना उनकी प्राथमिकता होगी। एनआईआरएफ की रैकिंग में विवि को प्रथम स्थान दिलाने के लिए कार्य किया जाएगा। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए व्यवस्था की जाएगी, जिससे छात्र रोजगारदाता बन सके। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के अनुसार सर्टिफिकेट व डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे। 2047 विकसित उत्तर प्रदेश के लिए कार्य किया जाएगा।

कृषि विवि में शुरू होंगे ये पाठ्यक्रम
- मास्टर डिग्री एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, मास्टर डिग्री मैथमेटिक्स एवं डाटा साइंस, मास्टर डिग्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मास्टर डिग्री डिजिटल एग्रीकल्चर, मास्टर डिग्री वन हेल्थ केयर और मास्टर डिग्री वाइल्ड एनिमल केयर हेल्थ के पाठ्यक्रम होंगे।
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आईवीआरआई से आने वाले तीसरे कुलपति बने डॉ. त्रिवेणी

मोदीपुरम। भारतीय पशु चिकित्सा अनुंसधान संस्थान आईवीआरआई इज्जतनगर बरेली के निदेशक रहते हुए डॉ. त्रिवेणी दत्त तीसरे कुलपति हैं। इससे पहले डॉ. एमपी यादव और डॉ. गया प्रसाद भी निदेशक रहते हुए कृषि विवि के कुलपति बने। कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त का कहना है कि मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए नीति-सहयोगी थिंक टैंक के रूप में भी उभर सकता है। गन्ना, गेहूं, धान, दुग्ध एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस क्षेत्र में विवि की भूमिका केवल शैक्षणिक संस्थान तक सीमित न रहकर कृषक आय वृद्धि, जलवायु-सहनशील कृषि, कृषि-व्यवसाय विस्तार के लिए रणनीतिक समाधान उपलब्ध कराने की भी रहेगी।
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