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प्राचीन व आधुनिक ज्ञान का साथ भारत की विशेषता : दलाईलामा

Tue, 17 Oct 2017 01:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

विश्व में फैलना चाहिए अहिंसा, प्रेम और शांति का संदेश चीन-तिब्बत मामले पर बोले, 60 वर्षों से हम कर रहे हैं अपनी पहचान बचाने को संघर्ष
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सीजेडेएवी स्कूल में आयोजित समारोह में दलाईलामा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
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दलाईलामा ने कहा कि उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध देखा है, जिसमें करोड़ों लोग मारे गए थे। आज 21 वीं सदी में लोगों की सोच बदल रही है, वो शांति चाहते हैं। इसलिए हमें शांति फैलाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए अहिंसा, करुणा, प्रेम और शांति का मार्ग अपनाना होगा। विश्व में हथियारों का विकल्प नहीं है, हथियार सिर्फ जीवन समाप्त करता है। संसार में धन और ताकत की तुलना में एकता, प्यार और शांति का अधिक महत्व है। भारत की विशेषता है कि वह अपने प्राचीन और आधुनिक ज्ञान को साथ लेकर आगे बढ़ता है। दलाईलामा ने ये विचार सोमवार को सीजेडेएवी स्कूल में आयोजित समारोह में कहे। वह यहां भारतीय शिक्षा प्रणाली में सार्वभौमिक आचार नैतिकता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही संस्था आर्युज्ञान न्यास द्वारा बनाए गए पाठ्यक्रम का शुभारंभ करने आए थे। आर्युज्ञान न्यास सन् 2014 में दलाई लामा के मार्गदर्शन में स्व. कुलभूषण बख्शी द्वारा स्थापित किया गया, ताकि संपूर्ण भारत के बच्चों में प्राकृतिक रूप से नैतिकता पैदा हो सके।
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अपने धर्म को न बताएं बड़ा
इस दौरान दलाईलामा ने कहा कि भारत ऐसा देश है जहां जाति और वर्ण व्यवस्था है। लेकिन यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था ने सबको बराबर कर दिया है, इसलिए जाति और वर्ण की बातें अब पुरानी हो चुकी हैं। वह बौद्ध धर्म को मानते हैं, लेकिन यह कभी नहीं कहते कि बौद्ध धर्म सबसे अच्छा है। न किसी को अपने धर्म को बड़ा बताना चाहिए। लेकिन बौद्ध धर्म विश्वास नहीं प्रयोग पर संचालित है।

गांधी जी और नागार्जुन मेरे रोल मॉडल
दलाईलामा ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों के बहुत ही सहज अंदाज में जवाब दिए। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि गांधी जी और नागार्जुन मेेरे रोल मॉडल हैं। गांधी जी ने अहिंसा का संदेश दिया तो हम उसे आगे बढ़ाते हुए करुणा का भी संदेश दे रहे हैं। चेहरा सुंदरता को प्रदर्शित करता है। लेकिन यदि उस चेहरे पर गुस्सा हो तो सुंदरता समाप्त हो जाती है और मुस्कान हो तो सुंदरता बढ़ जाती है। इसलिए सदैव मुस्कुराते रहें। दलाईलामा ने एक छात्रा के सवाल पर जवाब दिया कि अमीर व्यक्ति की अपेक्षा गरीब अधिक सुखी होता है, क्योंकि उसे धन और प्रसिद्धि पाने की लालसा नहीं होती है।
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चीन के लोग हमारे विरोधी नहीं
चीन पर पूछे गए सवाल पर दलाईलामा बोले कि वहां के लोग हमारे विरोधी नहीं है। सरकारी नीति विरोधी है। हमारा संघर्ष अपनी पहचान और संस्कृति को बचाने के लिए है, जो लगातार 60 वर्षों से जारी है। दलाईलामा ने कहा कि शिक्षा के द्वारा हम शांति, प्यार और एकता की भावना अपने अंदर उत्पन्न कर सकते हैं और संसार की भलाई के लिए कार्य कर सकते हैं। इसमें परिवार और स्कूल दोनों का बहुत योगदान होता है। भारत महान है, इसके अंदर सभी को अपने अंदर समाहित करने की क्षमता एवं गुण है।

लभूषण बख्शी को किया याद
दलाईलामा ने अपना संबोधन शुरू करते ही सबसे पहले कुलभूषण बख्शी को याद किया और कहा कि वह उनके घनिष्ठतम मित्रों में से थे। उनकी वजह से वह मेरठ पहले भी आ चुके हैं और आज भी आने का मौका मिला। दलाईलामा का सीजेडीएवी स्कूल पहुंचने पर मुख्य द्वार पर ही 9 संस्थाओं के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वागत किया। इनमें स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. अल्पना शर्मा, आर्युज्ञान न्यास के संस्थापक कुलभूषण बख्शी की पत्नी सुंदर बख्शी, आईआईएमटी के चेयरमैन योगेश मोहन गुप्ता, आर्युज्ञान न्यास के आशीष अग्रवाल, भारत तिब्बत सहयोग समिति के मयंक गुप्ता, कल्याणम करोती के रवि बख्शी, रामा संकीर्तन मंदिर ट्रस्ट के ओमप्रकाश फौजी, श्रीराम संस्कृति ट्रस्ट के द्वारिका नाथ, तिब्बती वूलन वेंडर्स संस्था के टी षेरिंग डोल्मा, जिलाधिकारी समीर वर्मा और एसएसपी मंजिल सैनी शामिल रहे।

तुलसी का पौधा किया भेंट
दलाईलामा को स्कूल की प्रधानाचार्या ने तुलसी पौधा, स्मृति चिन्ह, चारो वेद भेंट करने के साथ शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। आर्युज्ञान न्यास के कार्यक्रम का परिचय कराती हुई एक लघु फिल्म प्रोजेक्टर पर दिखायी गयी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश सी पांडे ने सार्वभौमिक नैतिकता के महत्व और उसको बच्चों में विकसित करने की आवश्यकता के बारे में बताया। इसी दौरान प्रदेश के नौ स्कूलों के प्रधानाचार्यों जिन्होंने सार्वभौतिक नैतिक शिक्षा के पाठ्यक्रम अपनाया है, उन्हें पाठ्यक्रम प्रदान किया गया। आयुर्ज्ञान न्यास के चेयरमैन सैंधाँग रिंपोचे, महासचिव दीप्ति गुलाटी, सारनाथ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर पद्मश्री गैशे नवांग शांतेन, कल्याण करोति के अध्यक्ष अनुराग दुबलिश आदि मौजूद रहे।
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