टीपीनगर थानाक्षेत्र के मुल्तान नगर निवासी मूर्ति कारोबारी दीपक शर्मा ने शनिवार को पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर पीके के खिलाफ थाना टीपी नगर थाने में तहरीर दी थी। आरोप है कि पीके ने दोपहर के समय उनके साथ मारपीट की थी और उनके छह साल के बेटे कक्षा एक के छात्र यशवर्द्धन को धक्का दे दिया था। पिता-पुत्र दोनों को चोट लगी थी।
पीड़ित पक्ष ने थाने में हंगामा किया तो पुलिस ने दीपक और यशोवर्द्धन का मेडिकल परीक्षण कराया था। पुलिस ने दीपक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया था। वहीं, घटना के करीब सात घंटे बाद पीके के थाने में बयान दर्ज कराने के साथ ही पीके का भी मेडिकल परीक्षण कराया था।
सवालों में पीके और पुलिस
इस पूरे प्रकरण को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। लोगों ने कहा कि पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर प्रवीण कुमार पर पिता-पुत्र की पिटाई करने के आरोप लगने के 30 घंटे बाद तहरीर देना पीके और पुलिस को संदेह के दायरे में खड़ा करता है।
बड़ा सवाल यही है कि यदि वास्तव में पीके के साथ मारपीट हुई तो तत्काल इसकी सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी गई। इस तरह से तहरीर देना क्या सोची समझी रणनीति है। लोगों ने व्यापारी नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा कि एक क्षेत्रीय संगठन तो ऐसे समय पीड़ित व्यापारी के साथ खड़ा हुआ। लेकिन चुनाव में उलझे संयुक्त व्यापार संघ के जिम्मेदारों ने ऐसे समय अपने व्यापारी को न्याय दिलाने के लिए क्या किया।
लोगों ने कहा कि शनिवार दोपहर करीब एक बजे से चले इस पूरे प्रकरण में पीड़ित मूर्ति कारोबारी दीपक शर्मा की सूचना पर टीपी नगर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दीपक और उनके बेटे का मेडिकल परीक्षण कराया। लेकिन तहरीर लेकर रख ली। पीके थाने नहीं पहुंचे।
मामला तूल पकड़ने पर पुलिस की खोजबीन के बाद ही क्रिकेटर कई घंटे बाद पुलिस के सामने पहुंचा। लेकिन तहरीर नहीं दी। सवाल है कि यदि प्रवीण के साथ घटना हुई थी तो शनिवार रात ही तहरीर क्यों नहीं दी। पुलिस की भूमिका भी निष्पक्ष नहीं रही।