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भारतीय जवान कंचन ऐसे बना पाकिस्तान का जासूस, सामने आई यह बड़ी वजह

Fri, 19 Oct 2018 01:10 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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पाकिस्तान से आई एक कॉल ने सेना के जवान कंचन सिंह को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कर दिया। सेना की नजर में अब वह देशद्रोह का आरोपी है। अभी तक की पूछताछ में यह पता चला है कि एक अनजान कॉल आने के बाद ही वह गोपनीय सूचनाएं लीक कर रहा था। खुफिया स्तर पर इस कॉल का पता लगाया जा रहा है। 

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सैन्य सूत्रों के मुताबिक सिग्नल रेजीमेंट के इस जवान के मोबाइल फोन पर 10 महीने पहले यह कॉल आई थी। माना जा रहा है कि ये आईएसआई की नियोजित कॉल थी लेकिन कंचन इसे समझ नहीं पाया। कॉलर आईएसआई एजेंट से बातचीत के बाद दोनों में दोस्ती हो गई। कंचन इसके जाल में ऐसा फंसा कि वह आईएसआई की डिमांड पूरी करने लगा। सैन्य सूत्रों की मानें तो उसने 25 के करीब दस्तावेज वाट्सएप के जरिए भेजे हैं। इनमें कुछ सैन्य क्षेत्र के नक्शे भी थे। अभी तक की पूछताछ में यह बात साफ हुई है कि जो भेजी गई जानकारियों से आईएसआई को कुछ खास हासिल होने वाला नहीं है लेकिन कंचन की निरंतर फोन पर होने वाली बातचीत से वह मिलिट्री इंटेलीजेंस और वेस्टर्न कमांड के रडार पर आया। 

सभी 62 कैंट में घुसपैठ चाहती है आईएसआई
देश में 62 छावनी क्षेत्र हैं। इनमें संवेदनशील कैंट की फेहरिस्त में मेरठ का नाम भी आता है। सैन्य अफसरों का कहना है कि आईएसआई देश के सभी छावनी क्षेत्रों में अपना नेटवर्क बनाना चाहती है। इसके लिए तरह-तरह से जवानों को लालच दिया जाता है। कई बार पाकिस्तान से आई रॉन्ग कॉल के जरिए भी शिकार तलाशे जाते हैं। कई बार फेसबुक से नंबर हासिल करके कॉल की जाती है तो कई बार किसी दूसरे माध्यम से। सैन्य अफसरों का कहना है कि कंचन भी इसी तरह से जाल में फंसा।

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कोर्ट मार्शल में उम्र कैद से लेकर फांसी तक की सजा
सेना में कोर्ट मार्शल से बड़ी सजा नहीं होती। इसमें उम्रकैद से लेकर फांसी तक का प्रावधान है। कुछ अपराधों को छोड़ दें तो बाकी में सेना को खुद सुनवाई करने का अधिकार है। ऐसे में जवान कंचन सिंह का बचना बेहद मुश्किल है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक जो जुर्म उसने किया है उसमें सेना भी उसे सजा सुना सकती है। हालांकि अधिकतर मामलों में सेना कोर्ट मार्शल की कार्रवाई के बाद आरोपी को सिविल पुलिस के हवाले कर देती है। कंचन सिंह को भी सैन्य कार्रवाई के बाद पुलिस के हवाले किया जा सकता है। 

चार तरह से होता है कोर्ट मार्शल
जनरल कोर्ट मार्शल : इसमें आर्मी के जवान से लेकर अफसर तक आते हैं। सुनवाई करने वाले लोगों में जज के अलावा 5 से 7 आर्मी के अफसरों का पैनल होता है। सुनवाई के बाद आरोपी को आजीवन प्रतिबंध, सैन्य सेवा से बर्खास्त किए जाने से लेकर उम्रकैद और फांसी तक की सजा सुनाई जा सकती है। मिलिट्री लॉ के अनुसार युद्ध के दौरान अपनी पोस्ट छोड़कर भागने वाले जवान-अफसर को फांसी तक की सजा दी जा सकती है।

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल : इसमें सिपाही से लेकर जेसीओ लेवल तक के आर्मीपर्सन आते हैं। सुनवाई दो या तीन मेंबर की बेंच करती है। ऐसे मामलों में अधिकतम दो साल तक की सजा हो सकती है।

समरी जनरल कोर्ट मार्शल : जम्मू-कश्मीर जैसे प्रमुख फील्ड इलाके, जहां अक्सर सेना तैनात रहती हो। वहां पर अपराध करने वाले आर्मी पर्सन के खिलाफ इस तरह की सुनवाई होती है।

समरी कोर्ट मार्शल : यह सैन्य अपराधों के लिए सबसे निचली अदालत होती है। इसमें सिपाही से लेकर एनसीओ लेवल के आर्मी पर्सन पर केस चलाया जाता है। इसमें भी अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है।
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इन मामलों में नहीं हो सकता कोर्ट मार्शल
दुष्कर्म, हत्या और गैर इरादतन हत्या जैसे मामलों की सुनवाई का अधिकार आर्मी कोर्ट को नहीं है। फील्ड इलाकों में भी अगर सैन्यकर्मी का ऐसा कोई अपराध सामने आता है तो उसकी जांच सेना सिविल पुलिस को सौंप देती है। हालांकि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में ऐसे मामले सामने आते हैं तो सेना उन्हें अपने हाथों में ले सकती है। इसमें त्वरित सुनवाई कर आरोपी को सजा देने का प्रावधान है। 

दो चरणों के बाद होता है कोर्ट मार्शल
कोर्ट मार्शल से पहले कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की जाती है। इसमें किसी तरह का अपराध या अनुशासनहीनता होने पर सबसे पहले कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश जारी होते हैं। जांच में आर्मीपर्सन पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होने और गंभीर मामला होने पर जांच अधिकारी तुरंत ही सजा दे सकता है। बड़ा मामला होने पर केस समरी ऑफ एविडेंस को रिकमेंड कर दिया जाता है, जो दूसरा चरण होता है। इसमें प्रारंभिक जांच में दोष सिद्ध होने पर सक्षम अधिकारी मामले और सबूत जुटाने के लिए जांच करता है और इसी आधार पर तुंरत सजा देने का भी प्रावधान है। इस दौरान सभी कानूनी दस्तावेज एकत्र किए जाते हैं। इनकी जांच के बाद अधिकारी तुरंत सजा या कोर्ट मार्शल के लिए रिकमेंडेशन करता है।

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