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Meerut News: बढ़ रहा मोटापा, उच्च रक्तचाप का शिकार हुआ बचपन

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बढ़ रहा मोटापा, उच्च रक्तचाप का शिकार हुआ बचपन
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मेरठ। बच्चे भी उच्च रक्तचाप (हाईपरटेंशन) के शिकार हो रहे हैं। इसके मुख्य कारणों में मोटापा, माता-पिता का उच्च रक्तचाप से पीड़ित होना और बच्चे को गुर्दे की पथरी होना आदि शामिल हैं। तीन साल से ज्यादा उम्र के बच्चों का साल में एक बार ब्लड प्रेशर चेक कराना चाहिए। यह व्याख्यान न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ गुप्ता ने दिया। शनिवार को आईएमए मेरठ शाखा यूपीसीजीपीकोन 2022 की स्टेट कांफ्रेंस और फेलोशिप ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर (एफसीजीपी) का आयोजन किया, जिसमें चिकित्सकों ने अपने व्याख्यानों के जरिये इलाज की नई नई तकनीक और बीमारियों के रूपों पर चर्चा की। अपने अनुभव साझा किए, ताकि चिकित्सा व्यवस्था को और बेहतर किया जा सके।
हाईपरटेंशन इन चिल्ड्रन (बच्चों में उच्च रक्तचाप) विषय के अलावा दिल के इलाज में बहुत कम सर्जरी का इस्तेमाल, घुटनों की आर्थराइटिस में दूरबीन से सर्जरी, घुटने बदलने की आधुनिक तकनीक, बैन मैरो ट्रांसप्लांट में आधुनिक दवाइयां आदि के बारे में विभिन्न व्याख्यानों के जरिये बताया गया। ये व्याख्यान डॉ. विभोर शर्मा, डॉ. पुनीत राणा, डॉ. अखिल कुमार रस्तोगी, डॉ. संजय सिंह नेगी और डॉ. अमित नाथ मिश्रा ने दिए। इस कार्यक्रम में प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से 150 से ज्यादा चिकित्सक शामिल हुए। मेरठ और उत्तर प्रदेश के करीब 33 चिकित्सकों को महत्वपूर्ण मानक उपाधि प्रदान की गई।
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इस कार्यक्रम में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष (निर्वाचित) डॉ. शरद अग्रवाल, राष्ट्रीय सचिव डॉ. जयेश लेले, उत्तर प्रदेश आईएमए के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह, सचिव डॉ. राजीव गोयल, स्टेट सीजीपी सचिव डॉ. शिशिर जैन, आर्गनाइजर डॉ. संदीप जैन और डॉ. मनीषा त्यागी, आईएमए मेरठ शाखा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता आदि मौजूद रहे। इस तरह का फेलोशिप कार्यक्रम मेरठ आईएमए में पहली बार आयोजित किया गया है।
सारी पैथी अच्छी, आईएमए मिक्सोपैथी के खिलाफ
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष (निर्वाचित) डॉ. शरद अग्रवाल ने कहा कि आईएमए में किसी पैथी के खिलाफ नहीं है, वह सभी पैथी का सम्मान करता है, लेकिन मिक्सोपैथी के खिलाफ है और इसका विरोध जारी रहेगा। दरअसल, सरकार ने आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और एलोपैथी को मिक्स करने का निर्णय लिया था, जिसका आईएमए ने विरोध किया था और अब भी कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सकों को खिलाफ दुर्व्यवहार को आईएमए बर्दाश्त नहीं करेगा।
कोरोना में 1800 डॉक्टर हुए शहीद
मुंबई से आए आईएमए के राष्ट्रीय सचिव डॉ. जयेश लेले ने कहा कि कोरोना काल में 1800 से ज्यादा डॉक्टर शहीद हुुए थे। 26 डॉक्टरों 10-10 लाख रुपये भी दिए हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में नए नए बदलाव होते हैं। जैसे वैक्सीन का इजाद हुआ और कोरोना को बचाव हुआ।
अचानक नहीं हो रही मौत, पहले से रही होगी परेशानी
उत्तर प्रदेश आईएमए के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि जिस तरह अचानक मौत के मामले आ रहे हैं, ये दरअसल, अचानक नहीं है। कोई न कोई बीमारी पहले से रही होगी। इसका अहसास भी शरीर ने कराया होगा, मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। समय से टेस्ट कराएं तो पता चल जाए क्या बीमारी है। आईएमए इलाज से ज्यादा बचाव पर जोर दे रहा है।
अब देहात में एमबीबीएस डॉक्टर कर रहे इलाज
नेशनल सीजीपी के डीन डॉ. अविनाश भोंडवे ने कहा कि आईएमए की 1700 से ज्यादा ब्रांच हैं। अब देहात में भी लोगों को एमबीबीएस डॉक्टर और सर्जन के जरिये इलाज मिल रहा है। सभी लोगों को बेहतर इलाज देने की कोशिश की जा रही है।
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इन डॉक्टरों को मिली मानद उपाधि
डॉ. अजय पुंज, डॉ. अशोक कुमार जैन, डॉ. अमित जैन, डॉ. दीपना गुप्ता, डॉ. राजीव प्रकाश, डॉ. तरुण गोयल, डॉ. उमेश वर्मा, डॉ. विकास गर्ग, डॉ. मो. सोलेह आदि शामिल रहे।
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