हर माह ऑनलाइन बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के भी आ रहे बढ़े बिल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्थिक रूप से बेहाल लोगों की बिजली के बढ़े बिलों ने नींद उड़ा दी है। जमा किए गए बिलों को दोबारा से जोड़कर भेजा जा रहा है। बढ़े बिजली बिलों का झटका उन उपभोक्ताओं को भी लग रहा है जो हर महीने ऑनलाइन बिल जमा करते आ रहे हैं। बढ़े बिलों के संशोधन करने से विभागीय कर्मी यह कहकर हाथ खड़े कर रहे हैं कि सॉफ्टवेयर में इसकी प्रोग्रामिंग ही नहीं है। इस तरह से पीवीवीएनएल की यह लूट उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रही है।
केस नंबर एक
सुभाष नगर निवासी उपभोक्ता मामचंद प्रेमी का 2 किलोवाट का घरेलू कनेक्शन है। इनका प्रतिमाह बिल औसतन 1500 रुपये तक आता है। लेकिन इस बार इनके पास दो महीने का बिल 9000 रुपये का भेजा गया है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
केस नंबर दो
आदर्शनगर कंकरखेड़ा निवासी वरुण सांगवान ने बताया कि कोरोना के चलते बिना मीटर रीडिंग लिए औसत आधार पर 1400 रुपये का बिल भेजा जा रहा था। इसे जमा करा दिया गया। अब मीटर रिडिंग से बने बिल में पिछले जमा बिल भी जोड़कर भेज दिया है।
केस नंबर तीन
गंगानगर निवासी अमित कुमार ने बताया कि उनका हर महीने करीब 2000 रुपये का बिल आता था। लेकिन इस बार 4500 रुपये का बिल भेजा गया है। इसे ठीक भी नहीं किया जा रहा है। अब मजबूरी में यह बिल भी जमा करना पड़ेगा।
बिल में कोई गड़बड़ी नहीं
लॉकडाउन के कारण मार्च और अप्रैल का बिल मीटर रीडिंग से नहीं बन पाया था। इसके लिए दिसंबर से जनवरी तक के तीन महीने के बिलों के आधार पर औसत फार्मूले से बिल बनाकर उपभोक्ताओं को मेसेज भेजे गए। अब मई का बिल मीटर रीडिंग आधारित भेजा जा रहा है। गर्मी में खपत बढ़ने से बिल ज्यादा आना प्रतीत हो रहा है। बिल में कोई हेराफेरी नहीं की जा रही है। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ