भारत से करीब 152 देशों में बासमती का निर्यात होता है। यहां पर जाने वाली बासमती का विदेशी स्वाद चख रहे हैं। सबसे ज्यादा बासमती की पैदावार भारत में ही हो रही है और यहां से ही विदेशों में निर्यात हो रहा है। इससे विदेशी मुद्रा भी अपने देश में ज्यादा आएगी और बासमती का निर्यात भी और बढ़ेगा।
पिछले तीन साल का निर्यात और मूल्य
| वर्ष |
निर्यात |
मूल्य |
| 2021-22 |
39.5 लाख टन |
26415 करोड़ |
| 2022-23 |
45.6 लाख टन |
38524 करोड़ |
| 2023-24 |
52.4 लाख टन |
48390 करोड़ |
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नोट : निर्यात लाख टन में और मूल्य करोड़ में है।
आयात करने वाले टॉप टेन देश
सऊदी अरब, ईराक, ईरान यमन रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात, यूएसए, यूके, कुवैत, ओमान, कतर, कनाडा।
इन प्रजातियों की है सबसे ज्यादा मांग
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा का कहना है कि बासमती चावल की मांग बढ़ी है। जिनमें सबसे ज्यादा पूसा बासमती 1121, बासमती 1509, बासमती 17 आदि हैं।
ये है 1121 पूसा बासमती प्रजाति की खासियत
-इस प्रजाति का चावल लंबा होता है और निर्यात अधिक होता है।
-इस चावल का साइज 12 एमएम से भी बड़ा होता है।
-औसत पैदावार एक बीघा में 45 से 50 और अधिकतम 60 िक्वंटल है।
-इस प्रजाति को 2005 में रिलीज किया।
बासमती का निर्यात विदेशों में बढ़ रहा है। इस बार निर्यात के सभी रिकाॅर्ड टूट गए हैं, अभी तक का विश्व रिकॉर्ड है। - डॉ. रितेश शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक, बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान