हरियाणा सरकार द्वारा कब्रिस्तान की भूमि आवंटित न किए जाने से करनाल जनपद के बड़ागांव के मृतकों को दफन करने के लिए दो गज जमीन नसीब नहीं होती। वहां के लोग किसी के मरने पर उन्हें दफनाने के लिए यूपी की सीमा में आते हैं। बृहस्पतिवार को एक ग्रामीण की मौत के बाद बड़ागांव के लोगों के लिए फिर से उसे दफनाने के लिए यमुना नदी पार कर यूपी की सीमा में आना पड़ा।
आजादी के बाद हुए बंटवारे के दौरान यामीन और अलीमुदीन, बशीर अहमद समेत करीब एक दर्जन परिवार के लोग करनाल के गांव रसूलपुर से वहीं के गांव बडागांव मे आकर बस गए थे। जब से लेकर आज तक वहां की सरकार और प्रशासन इन परिवारों को कब्रिस्तान की भूमि उपलब्ध नहीं कर सका। तब से ही परिवारों में जब भी कोई मौत होती है। यह लोग यमुना नदी पार करके यूपी मे शव को दफनाने के लिए आते हैं। सोमवार को बीमारी के चलते 75 वर्षीय यामीन की मौत इलाज के दौरान करनाल के सरकारी अस्पताल में हो गई थी। परिजनों के सामने फिर से शव को दफन करने का संकट खड़ा हो गया। यामीन के शव को घर में रखकर परिजन सरकार और प्रशासन दो दिन तक दो गज जमीन की मांग करते रहे, लेकिन अधिकारी और सरपंच वहां आए पर समस्या का समाधान नहीं निकाल सके। जिस कारण से परिजन मजबूरी वश शव को यमुना नदी पार करके गंगोह कोतवाली क्षेत्र यमुना खादर के गांव बेगी बांस देवा में दफनाने के लिए ले आए। नवाब पहलवान, अनवर अहमद, यासीन ने हरियाणा सरकार से कब्रिस्तान के लिए भूमि देने की मांग की है।