हस्तिनापुर के खेड़ीकलां में प्रदेश का शायद यह पहला ऐसा प्राथमिक स्कूल होगा, जहां ग्रीष्मावकाश चार माह का होता है। इसका कारण भी जायज है, क्योंकि जब बारिश के कारण गंगा उफान पर होती है तो शिक्षक जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने से डरते हैं। इसलिए यहां मई में ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल सीधे अक्तूबर में खुलता है।
इस सरकारी स्कूल में क्षेत्र के बधवा गांव के बच्चे भी पढ़ते हैं। जहां दो शिक्षक तैनात हैं और करीब 150 बच्चे पंजीकृत हैं। गांव के नरेंद्र कुमार आदि के अनुसार स्कूल 20 मई को ग्रीष्मावकाश के कारण बंद हो जाता है। उसके बाद जनपद के तमाम स्कूल तो एक जुलाई को खुल जाते हैं। लेकिन उनके गांव का स्कूल नहीं खुलता है। इसका कारण बारिश के कारण गंगा में लगातार बढ़ता पानी होता है। क्योंकि आने-जाने के लिए सिर्फ एक नाव ही सहारा है। गंगा में पानी बढ़ जाने के कारण नाव से चलना भी खतरा भरा होता है। यह पानी सितंबर के अंतिम सप्ताह तक कम होता है। इसके बाद ही शिक्षक स्कूल जाना शुरू करते हैं।
अक्तूबर में होती है पढ़ाई शुरू
खेड़ी कला के प्राथमिक स्कूल में बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस आदि का वितरण अक्तूबर में शुरू होता है। साथ ही पढ़ाई भी शुरू होती है। अब 120 दिन का अतिरिक्त अवकाश होने के चलते इन बच्चों की पढ़ाई कैसे होती होगी, इसे सहज ही समझा जा सकता है।