प्रदेश में योगी सरकार ने जो वादे किये थे, वह स्थानीय स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार में फंसे नजर आये। कुछ में तो भाजपाई ही पुलिस प्रशासन की राह का रोड़ा बने नजर आये, तो कुछ में प्रशासन और पुलिस के साथ तमाम विभागीय अधिकारी पुराने ढर्रे पर लौटते नजर आये। छह माह बीतने पर वादे आधे अधूरे ही पूरे हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि कुछ जगहों पर सुधार भी हुए हैं।
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भूमाफियाओं पर नहीं हुआ बड़ा एक्शन
जनपद में सरकारी जमीनों पर बड़े स्तर पर कब्जा है। देहात से लेकर शहर तक तमाम सरकारी विभागों की जमीनाें पर भूमाफिया काबिज है। लेकिन इक्का दुक्का मामले देहात के छोड़ दें तो बाकी जमीन अभी तक कब्जा मुक्त नहीं करायी जा सकी है। भूमाफियाओं पर कार्रवाई के बजाए प्रशासन का रुख अवैध निर्माणों की तरफ होकर दिशा भटक गया। जिससे जनता के साथ ही खुद भाजपाई प्रशासन के सामने अड़ गये और कार्रवाई में ब्रेक लग गया। जबकि देहात क्षेत्र में वन विभाग, सिंचाई विभाग, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत आदि की तमाम जमीनों पर जहां कब्जे हैं। तो शहरी क्षेत्र में नजूल के साथ ही नगर निगम, जिला पंचायत, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, आवास एवं विकास परिषद आदि की जमीनों पर कब्जे हैं। लेकिन छह माह में न तो पूरा रिकार्ड ही प्रशासन खंगाल पाया और न ही जमीनों से कब्जा हटा पाया
समय की पाबंदी सिर्फ जिला मुख्यालय पर
सीएम योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को समय पर कार्यालय में बैठने के सख्त निर्देश दिये थे। लेकिन यह पाबंदी सिर्फ जिला मुख्यालयों में नजर आ रही है। तहसील और ब्लाक स्तर पर अधिकारी कार्यालयों में समय से बैठना तो दूर अक्सर गायब ही नजर आते हैं। जिस कारण फरियादी जिला मुख्यालय की तरफ अभी भी दौड़ने को मजबूर हैं।
गन्ना भुगतान और बिजली आपूर्ति में फेल
प्रदेश की शुगर मिलों ने अभी तक संपूर्ण गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया हैै। अभी भी दो हजार करोड़ रुपया मिलों के पास बकाया है। वहीं गांवों में बिजली आपूर्ति का बुरा हाल है। सरकार बनते ही सरकार ने गांवों को 16 घंटे से बढ़ाकर 18 घंटे आपूर्ति करने का शेड्यूल जारी करा दिया था। लेकिन कुछ दिन तक शेड्यूल अनुसार ही बिजली आपूर्ति हो सकी। गर्मी बढ़ते ही 18 घंटे आपूर्ति दम तोड़ने लगी और 10 से 11 घंटे ही बिजली मिली। मेरठ मंडल के गन्ना किसानों का शुगर मिलों पर अभी तक 630 करोड़ रुपये बकाया है। इतना ही नहीं सरकार सहकारी गन्ना मिलों से भी पूरा भुगतान नहीं करा सकी है। मंडल की रमाला, बागपत और अनूपशहर शुगर मिल पर 32 करोड़ से ज्यादा बकाया है।
बेहतर हो गई स्वास्थ्य सेवाएं
सूबे में भाजपा सरकार के छह माह पूरे हो गए हैं। मेरठ में स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी का निरीक्षण भी किया। उन्होंने हिदायत दी कि इमरजेंसी में बेहतर इलाज की व्यवस्था हो, जिससे मरीजों को रेफर न किया जाए। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया और पुरानी बिल्डिंग की जगह नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव मांगा, जिसे शासन को भेज दिया गया है। मेडिकल कॉलेज की ओटी के उच्चीकरण के लिए 4.39 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। दवाओं के बजट के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया बीमारी केलिए अलग से वार्ड बनाए जाने के लिए करीब 76 लाख रुपये जारी किए गए हैं। दवा आदि के लिए भी एक करोड़ रुपये जारी किए गए थे। साथ ही बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू हो गई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रहे डॉ. केके गुप्ता को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। जिला अस्पताल में डेंगू और मलेरिया की जांच के लिए सेंटिनल लैब बनाए जाने के लिए किट उपलब्ध कराई गई है और मशीन भी मुहैया कराई गई है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी के इलाज की विधिवत शुरुआत हुई है।
अपराधियों पर शिकंजा
जेल
योगी सरकार के छह माह के कार्यकाल में अपराधियों पर थोड़ा अंकुश लगा है। मुठभेड़ में बदमाशों को गोली का जवाब गोली से दिया गया। सरकार बनने के 15 दिन तक क्राइम का ग्राफ तेजी से घटा। उसके बाद लूट, डकैती, अपहरण और हत्या की वारदातें हुई। पिछले दिनों पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों के घायल होने पर पुलिस का मनोबल बढ़ा है। हालांकि अभी क्राइम में ज्यादा गिरावट नहीं आयी। पुलिस अधिकारी बार-बार बदमाशों को उनके तरीके से जवाब देने की बात कहते हैं।
फैक्ट्रियों पर सील तो लगी, लेकिन अवैध कमेले नहीं हुए बंद
सूबे में योगी सरकार के आते ही मेरठ में मीट फैक्ट्रियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन, एमडीए, नगर निगम, प्रदूषण विभाग, वन विभाग, पशुपालन विभाग समेत तमाम विभागों ने संयुक्त रूप से छापेमारी की थी। इस दौरान जहां अधिकतर फैक्ट्रियों की बिल्डिंग अवैध मिली, वहीं पशु कटान का अवैध कारोबार भी बडे़ पैमाने पर होता मिला। हापुड़ रोड पर अधिकतर मीट फैक्ट्रियों पर सील लगा दी गई। लेकिन यह फैक्ट्रियां फिर शुरू हो गई। इतना ही नहीं शहर में अब मिनी कमेले खुलेआम चल रहे हैं। रात के अंधेरे में प्रतिदिन पशुओं का कटान होता है। पशु चोरी की घटनाओं में तो जरूर कमी आयी, लेकिन अवैध पशु कटान बंद नहीं हुआ। इतना ही नहीं योगी सरकार ने अवैध मीट की दुकानों को बंद कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। एक-दो सप्ताह तक तो सरकार के आदेश पर अमल दिखा, उसके बाद शहर की विभिन्न गलियों में मानकों को ताक पर रखकर अवैध मीट की दुकानें खोल दी गयी। इतना ही नहीं अब सड़क किनारे दुकानों पर फिर कटान भी शुरू हो गया।
सरकार की प्राथमिकता थी कि सड़कें गड्ढा मुक्त हों। सरकार के आदेश पर अमल तो हुआ, लेकिन मात्र औपचारिकता ही रही। सड़कें गड्ढा मुक्त तो हुई, लेकिन फिर शहर ही नहीं देहात की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो गयी। अगर योगी सरकार के छह माह के कार्यकाल में सड़कों के हाल की बात करें तो 20 जून से दस जुलाई तक ही सड़कों की स्थिति बेहतर रही। लेकिन इसके बाद हलकी बारिश में ही सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई। इसकी तस्वीर सड़कों पर साफ देखी जा सकती है। अभी भी शहर में शायद ही कोई ऐसा रोड हो जहां गड्ढे न हों। इस तरह कुल मिलाकर योगी सरकार के छह माह के कार्यकाल में मात्र 20 दिन ही ऐसे रहे, जब मेरठ की जनता को गड्ढा मुक्त सड़कों पर चलने का मौका मिला। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए नगर निगम, एमडीए, पीडब्लूडी, आवास विकास और जल निगम जिम्मेदार हैं। कुछ विभागों ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए प्लांट न चलने का बहाना बनाया तो कुछ ने धन की कमी रोना रोया। यानी प्रदेश सरकार की भद्द पिटवाने में विभागों ने भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।
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