ट्रक छोड़ने की एवज में मांगे 25 हजार
मेरठ। सरूरपुर थाने में तैनात एक दरोगा पर दुर्घटना में बंद ट्रक को छोड़ने की एवज में 25 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। बुधवार को पीड़ित ट्रक चालक पुलिस आफिस पर अफसरों से मिला और न्याय की गुहार लगाई। दरोगा ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
गोंडा के ग्राम राजजोत अनेगी निवासी चंद्र शेखर सोनकर ने बताया कि 12 नवंबर को वह अपने ट्रक में सामान लादकर अंबाला से बिहार के हाजीपुर के लिए रवाना हुआ। अगले दिन करनाल-मेरठ रोड पर सरूरपुर थाने के ग्राम भूनी चौराहे के निकट पहुंचा तो विपरीत दिशा से डिवाइडर को तोड़ते हुए एक कार उनके ट्रक से जा टकराई। पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक को कब्जे में ले लिया। उसे भी लॉकअप में बंद कर दिया गया। जबकि दुर्घटना में उसकी कोई गलती नहीं थी। आरोप है कि 15 नवंबर को थाने के दरोगा रणजीत सिंह उनसे मिले और कहा कि अगर वह कुछ खर्च करते हैं तो वह उस पर मुकदमा दर्ज नहीं होने देंगे। 25 हजार रुपये की मांग की गई, जिसमें से 10 हजार रुपये उसने मौके पर ही उपलब्ध करा दिए। लेकिन दुर्घटना में मरे लोगों के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने फिर भी उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। उसी शाम उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। चंद्रशेखर का कहना है कि जब उसने दरोगा से अपने रुपये वापस मांगे तो उसने भरोसा दिलाया कि वह मामले में उसकी मदद करेगा और जल्दी उसका ट्रक भी छुड़वा देगा। कई दिन बीतने के बाद भी न तो उसके रुपये लौटाए और न ही ट्रक ही रिलीज कराया गया। अब उससे 10 हजार रुपये की और मांग की जा रही है। एसपी क्राइम राम अर्ज ने सीओ सरधना को जांच के आदेश दिए हैं।
- आरोप निराधार
दरोगा रणजीत सिंह ने आरोप नकारते हुए कहा कि दुर्घटना में बंद वाहन को रिलीज करने की एक कानूनी प्रक्रिया है। उन पर बिना वेरिफिकेशन कि ए रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाया जा रहा था। मना किया तो यह आरोप लगा दिए गए।