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इन नालों की कौन सुध लेगा मंत्री जी?

Tue, 21 Aug 2018 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर निगम के अफसरों की जुबान से सुनी नाला सफाई अभियान की कहानी पर नगर विकास मंत्री गदगद हो गए। अगर वह एक बार स्थलीय निरीक्षण कर लेते तो शायद नाला सफाई की जमीनी हकीकत से रूबरू हो जाते। सच्चाई तो यह है कि शहर के एक सैकड़ा से अधिक नाले तक सफाई कर्मियों की पहुंच ही नहीं है, क्योंकि इन नालों की पटरियों पर स्थाई निर्माण हो चुके हैं। ऐसे में किसी भी नाले की सफाई नहीं हुई है। इस हकीकत को भाजपा के कुछ पार्षदों ने सामने रखने के लिए नगर विकास मंत्री को ज्ञापन भी सौंपे। 
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नालों तक तो मशीन ही नहीं पहुंची 
महानगर के ऐसे कई बड़े नाले हैं जहां निगम की पोर्कलेन नहीं पहुंचती है और न ही नालों में मशीनें उतारकर सफाई करायी जा सकती है। नगर निगम के दावे खोलने के लिए ऐसे 100 से अधिक नाले हैं। जहां की सफाई हुई ही नहीं। भला हो बीते माह हुई तेज बारिश का, जिसके कारण काफी सिल्ट बहकर आगे चली गई। 

ये नाले बता रहे सफाई की कहानी 
- भैसाली रोडवेज के पीछे थापरनगर से गुजर रहा नाला बच्चा पार्क नाले में मिलता है। यह मोहनपुरी, फूलबाग कॉलोनी से होकर गढ़ रोड पर आबूनाला में मिलता है। इस नाले में भरी सिल्ट से साफ हो जाएगा कि नाले की सफाई हुई या नहीं। 
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- घंटाघर से कोटला होते हुए ओडियन नाले में मिलने वाला नाला सिल्ट और कूड़े से भरा है। नाले में पौधे उगने लगे हैं। नाला साफ हुआ होता तो नाला कूड़े से न भरता। नाले के ऊपर चल रही डेयरियों से निकलने वाला गोबर इसी नाले में बहाया जाता है। निगम कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। 
- ओडियन नाला भी जगह-जगह सिल्ट से भरा पड़ा है। कई स्थानों पर सिल्ट सूख गई है। नाले में भरा गोबर नाला सफाई की पोल खोल रहा है। आरटीओ पुल के निकट शास्त्रीनगर से गुजर रहे नाले की पटरी पूरी तरह कब्जे में है। यहां भी सफाई नहीं हो पाती है। 
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नाला सफाई का ड्रामा हुआ है। पार्षद तो हमसे नाला साफ न होने की शिकायत करते हैं। अधिकारी क्या कर रहे हैं, सभी को पता है। 
 -सुनीता वर्मा, महापौर। 
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