नेशनल एग्जिट टेस्ट का विरोध शुरू हो गया है। बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मेरठ शाखा की तरफ से मेडिकल कॉलेज में विरोध जताया गया। एमबीबीएस व पीजी के छात्रों ने पैदल मार्च निकाला। छात्र अपने हाथों में बैनर व पोस्ट लिये हुए थे, जिन पर एग्जिट टेस्ट के विरोध में नारे लिखे हुए थे। आईएमए अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर, महामंत्री डॉ. रेणु भगत व सीनियर चिकित्सकों ने कहा कि संगठन हर स्तर पर छात्रों की मदद करेगा।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय मेडिकल काउंसिल बिल में संशोधन के जरिये नेशनल एग्जिट टेस्ट ला रहा है। जिसके बाद एमबीबीएस करने वाले छात्रों को प्रैक्टिस करने की अनुमति तभी मिलेगी जब वह टेस्ट पास कर पाएंगे। एमबीबीएस की उपाधि भी टेस्ट के बाद ही मिलेगी। सरकार देश भर के मेडिकल कॉलेज में शैक्षिक क्वालिटी में एक रूपता लाने की बात कहकर टेस्ट की पैरवी कर रही है। आईएमए अध्यक्ष का कहना है कि ऐसे समय में जब देश के अंदर चिकित्सकों की कमी हो और एक छात्र पूरी शैक्षिक योग्यता के आधार पर एमबीबीएस में चयन पाता है तो टेस्ट की जरूरत नहीं है। फाइनल ईयर के एग्जाम को ही टेस्ट बनाया जाए। डॉ. रेणु भगत ने कहा कि फाइनल ईयर के टेस्ट के आधार पर ही पीजी में छात्रों को प्रवेश दिया जाए। विरोध के साथ ही प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और एमसीआई चेयरमैन के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया। इस मौके पर डॉ. एसएम शर्मा, डॉ. सुनील गुप्ता, डॉ. ज्ञानेश्वर टांक, डॉ. योगिता सिंह, डॉ. रवि भगत, डॉ. उमंग अरोड़ा, डॉ. शांति स्वरूप, डॉ. ललिता चौधरी. डॉ. रीता जैन, डॉ. मनीषा तोमर, डॉ. नवनीत अग्रवाल, डॉ. नितिन स्वामी, डॉ. इर्तिजा , डॉ. आदित्य मौजूद रहे।