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हस्तिनापुर के जंगल में चल रही थी अवैध तमंचा फैक्ट्री

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हस्तिनापुर में पकड़ी अवैध तमंचा फैक्टरी
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मेरठ। क्राइम ब्रांच और पुलिस ने छापा मारकर हस्तिनापुर के जलालपुर जौरा गांव के जंगल मेें अवैध तमंचा फैक्टरी पकड़ी है। मुखबिर की सूचना पर शनिवार रात हुई कार्रवाई में पुलिस ने भारी संख्या में बने और अधबने तमंचे बरामद किए हैं। पुलिस ने हापुड़ निवासी तमंचा बनाने के दो कारीगरों को भी गिरफ्तार किया है। पिछले छह माह से यह गैंग ऑन डिमांड तमंचे बनाकर वेस्ट यूपी के जिलों में सप्लाई कर रहा था।
पुलिस लाइन में हुई प्रेसवार्ता में एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि शनिवार रात सूचना मिली कि हस्तिनापुर के जंगल में बनी झोपड़ी में तमंचे बनाए जा रहे हैं। इसके बाद सीओ मवाना यूएन मिश्र और एसओ हस्तिनापुर धर्मेंद्र कुमार ने छापा मारा। पुलिस ने मौके से राजेश पुत्र लाखन सिंह निवासी मोहल्ला चटाई वाला थाना गढ़, और विकास पुत्र भगवत निवासी विरसनपुर थाना सिंभावली को पकड़ा। मौके से चार तमंचे, दो अधबनी राइफल, आठ अधबनी बंदूक, 16 अधबने तमंचे, भारी संख्या में बैरल, बट, फ्रेम, ड्रिल मशीन आदि सामान बरामद किया गया है।
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डेढ़ दिन में बना देते थे तमंचा
आरोपी राजेश ने बताया कि वह पूर्व में गाड़ी चलाता था। कुछ समय पहले उसकी दोस्ती मुजफ्फरनगर के खालापार निवासी शादाब से हुई। शादाब ने उसे तमंचे बनाया सिखाया। छह माह से वह जलालपुर जौरा के जंगल में बनी झोपड़ी में तमंचे बना रहे थे। इससे पहले गढ़ के खादर में वह तमंचे बनाने का काम कर रहे थे। एक तमंचा 1800 से दो हजार, बंदूक तीन हजार और देशी राइफल चार हजार रुपये में बेचते थे। मेरठ के अलावा, बागपत, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बुलंदशहर में भी तमंचे सप्लाई कर चुके हैं। पिछले छह माह में 80 से 90 तमंचे सप्लाई कर चुके हैं। आरोपी विकास ने बताया कि एक तमंचा बनाने में डेढ़ दिन लगता है।
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