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चर्चित नाला प्रकरण: मदरसा में धस्त कराया अवैध कब्जा, मौके पर तैनात रही भारी पुलिसफोर्स

Wed, 25 Sep 2019 01:51 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मदरसा में नाला से अवैध कब्जा ध्वस्त कराया गया - फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर के एक मदरसा में कई वर्षों से विवादित बना चर्चित नाला प्रकरण में प्रशासन ने जेसीबी चलवा कर अवैध निर्माण को ध्वस्त करा दिया। मदरसा संचालक द्वारा किए गए समझौता के अनुसार अवैध कब्जा नहीं हटवा सके थे, जिसको लेकर नगर पंचायत चेयरमैन ने अतिक्रमण हटवाने की घोषणा कर दी थी। एसडीएम ने इस मामले को लेकर खुद कमान संभालते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी। इस कार्रवाई के दौरान कस्बे को छावनी बना दिया गया था। पीएसी के अलावा कई थानों का पुलिस बल मौजूद रहा। मदरसा से अवैध अतिक्रमण हटवाने के दौरान कस्बे में पुलिस बल लगातार गश्त करता रहा। 

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कस्बे के मोहल्ला गंज स्थित तालीम-उल कुरान के नाला प्रकरण को लेकर सोमवार को रालोद नेताओं और जमीयत उलमा हिंद के पदाधिकारियों और मदरसा संचालक मौलाना नजीर अहमद के बीच समझौता हो गया था, जिसमें तय हुआ था कि मंगलवार को मदरसा संचालक अवैध अतिक्रमण हटवा लेंगे। इस संबंध में मदरसा संचालक की ओर से लिखित में दे दिया गया था। मंगलवार को मदरसा संचालक ने अवैध निर्माण तुड़वाने का काम शुरू कराया, लेकिन मदरसा संचालक ने समझौते के आधार पर अवैध कब्जा नहीं हटवाया। एसडीएम ने मंगलवार सुबह राजस्व टीम को भेजकर अवैध निर्माण पर निशानदेही कराई। इसके बावजूद मदरसा संचालक अवैध निर्माण हटाने के बजाय अपनी हठधर्मी पर आ गए। मंगलवार दोपहर तक मदरसा संचालक द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रवेंद्र भड़ाना ने तीन बजे सोशल मीडिया पर अतिक्रमण हटाने की सूचना वायरल कर दी, जिसको लेकर प्रशासन में हड़कंप मच गया। दोपहर बाद सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार ने कस्बे में पहुंचकर एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी, सीओ सोमेंद्र नेगी व नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार शुक्ला और इंस्पेक्टर योगेश शर्मा से वार्ता कर नाले पर अतिक्रमण के बारे में बातचीत की। उन्होंने अतिक्रमण हटवाने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा भेजे गए प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि शाम पांच बजे के बाद अतिक्रमण हटवा दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने एसडीएम व सीओ को निर्देश दिए। 

एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी व सीओ सोमेंद्र नेगी, नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार शुक्ला जेसीबी और कई थानों की पुलिस, पीएसी बल लेकर मदरसे के बाहर पहुंच गए। मदरसा संचालक के पुत्र मौलाना लुकमान व मौलाना इरफान ने पहले मदरसे के बराबर पर स्थित महेश चंद शर्मा की चक्की को तोड़ने के लिए कहा गया। एसडीएम ने ईओ द्वारा चक्की संचालक को बुलाकर चक्की के कोने पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने की बात कही, तो महेश चंद शर्मा ने अतिक्रमण हटाने के लिए राजी हो गए। प्रशासन द्वारा दो जेसीबी मशीनों से नाले पर अतिक्रमण को ध्वस्त कराना शुरू कर दिया। अतिक्रमण गिराए जाने के दौरान कस्बे के काफी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए थे। समझौते के अनुसार 130 फुट लंबे नाले में 15 फुट चक्की संचालक की तरफ सहित 27 फुट नाले का निर्माण किया जाएगा।
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सुरक्षा व्यवस्था चौकस
कस्बे में नाला प्रकरण को लेकर सन 2012 में कस्बे की स्थिति खराब होने से बाल बाल बची थी। जिसके लेकर प्रशासन ने नाले प्रकरण को हल्केपन में नहीं लिया। प्रशासन ने इसकी थ्योरी पर रिसर्च कर कस्बे की स्थिति को जाना और नाला प्रकरण को लेकर पिछले कई दिनों से इस पर योजना तैयारी की, जिसको लेकर उन्होंने दो दर्जन लोगों पर पांच-पांच लाख रुपयों के पाबंद मुचलके की कार्रवाई की। इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपी देहात नेपाल सिंह द्वारा थाने में बैठकर तमाम स्थिति पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही कई थानों की पुलिस व पीएसी कस्बे के मेन चौपलों व मदरसे के आसपास लगा दी गई थी।

मीनार गिरने से एक बड़ा हादसा होने से बचा
प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटवाते हुए मदरसे के कोने पर कमरे को गिराते समय उसके ऊपर बनी मीनार अचानक गिर गई। जिसकी चपेट में चक्की संचालक महेश चंद शर्मा व जेसीबी चालक आने से बाल बाल बचे। मीनार गिरते देख कई लोग बच गए। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

ड्रोन की निगरानी में हुई मदरसा पर कार्रवाई
प्रशासन पूर्व हो चुके विवादों को लेकर पूरी तरह से गंभीर था। इसलिए एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी ने अतिक्रमण हटवाने की तमाम कार्रवाई को ड्रोन में कैद करवाया। उधर, मदरसा संचालक मौलाना नजीर अहमद कासमी का अपना एक समाज में वर्चस्व रहा है। सन 2013 में दंगों के दौरान तत्कालीन सपा सरकार ने विशेष विमान से मौलाना को लखनऊ बुलाकर मेहमाननवाजी की थी। उसके बाद सपा सरकार ने मौलाना को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी। उस वक्त मौलाना के पास कस्बे के लोग काफी संख्या में आते जाते थे।

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