डालूहेड़ा के जंगल में रात डेढ़ बजे एक खेत के भीतर हेलोजन लाइट लगाकर दो जेसीबी मशीन खनन में लगी थीं। इनके पास दो डंफर थे, जो भरे जा रहे थे। करीब 17 बीघा के इस खेत को कई जगह पर 8 से 10 फुट तक खोदा जा चुका था, तो कई जगह 4-5 फुट तक खुदाई हो चुकी थी। खनन माफिया इस मिट्टी को निजी कालोनियों और आवासों के भराव के लिए बेचने ले जा रहा था। विभागीय सूत्रों से पता चला कि इस खनन की कोई स्वीकृति विभाग से नहीं ली गई है।
हाईटेंशन लाइन के खंभों को भी खतरा
जिस खेत में खनन हो रहा था, उसके ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। खेत में भी खंभे हैं, जो गहरे खनन के कारण कभी भी दुघर्टना का कारण बन सकते हैं।
कई जगह चल रहा खनन
जनपद में सबसे ज्यादा खनन भावनपुर, मेडिकल, मुंडाली, गंगानगर, पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा, इंचौली और दौराला थाना क्षेत्र में चल रहा है। इनमें भावनपुर थाना क्षेत्र के एक खनन माफिया के साथ तो विभागीय अधिकारियों की सेटिंग इस कदर है कि वे दिन में भी एक स्वीकृति पर कई-कई जगह खनन कर रहा है। एक मंत्री भी इस खनन माफिया की शिकायत जिला प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
नियमों के विपरीत स्वीकृति
सेटिंग का खेल इस कदर हावी है कि जिस जगह पर खनन विभाग पहले ही स्वीकृति दे चुका है, वहीं दूसरे ठेकेदार को अनुमति दे दी गई। जबकि नियमानुसार 500 मीटर के दायरे में दूसरी अनुमति नहीं दी जा सकती है। वहीं इस बारे में खनन अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
अवैध खनन को लेकर कई बार सख्त आदेश जारी किए गए हैं और कार्रवाई भी हो रही है। यदि कहीं अवैध खनन हो रहा है, तो इसकी जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
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