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Meerut News: दोषी नहीं थे अधिकारी तो क्यों दर्ज की गई एफआईआर

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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की आग अब पूरे शहर में फैल रही है। हजारों लोगों के रोजगार छिन चुके हैं और अब उनके आशियानों को भी तोड़ने की तैयारी है। इस भारी तबाही के बीच जनता अब एक बुनियादी सवाल पूछ रही है आखिर आवास विकास परिषद के उन असली गुनहगार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी जिनकी मिलीभगत से यह अवैध निर्माण हुआ। लोगों ने कहा कि जब व्यापारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो सकती है तो नामजद अधिकारियों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन के हाथ क्यों बंधे हैं।
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संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कहा अगर आवास विकास के ये 45 अधिकारी दोषी नहीं थे तो उनके खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई। अगर वे अपराधी हैं तो उन्हें जेल क्यों नहीं भेजा गया। उन्होंने मांग की कि इन भ्रष्ट अधिकारियों को न केवल जेल भेजा जाए बल्कि व्यापारियों को हो रहे आर्थिक नुकसान की भरपाई भी इन्हीं अधिकारियों की संपत्ति से की जाए। गुप्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर अधिकारियों को बचा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद 16 अक्तूबर 2025 को आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता आफताब अहमद की तहरीर पर 45 अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 217 और 218 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि इन अधिकारियों ने अपने कार्यकाल के दौरान नियमों की अनदेखी कर अवैध निर्माण होने दिए। हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही कोई विभागीय ठोस कार्रवाई। दूसरी ओर प्रशासन ने न्यायालय के आदेश पर तेजी दिखाते हुए 44 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है और अब 859 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का नोटिस थमाया जा रहा है।
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इनके खिलाफ 2025 में हुई रिपोर्ट दर्ज
प्राथमिकी में एसपीएन सिंह (अधीक्षण अभियंता), जीएस पालीवाल (से.नि. अधीक्षण अभियंता), जमना प्रसाद (से.नि. अधिशासी अभियंता), एके जैन (अधिशासी अभियंता), आरके गुप्ता (अधिशासी अभियंता), नरसिंह प्रसाद (अधीक्षण अभियंता), एके बंसल (से.नि. अधीक्षण अभियंता), सीके जैन (अधीक्षण अभियंता), अरविंद कुमार (अधीक्षण अभियंता), हरेंद्र सिंह नरेश (से.नि. अधीक्षण अभियंता), राम सहाय सिंह (अधीक्षण अभियंता), ज्ञानेंद्र सिंह (अधीक्षण अभियंता), देवेंद्र सिंह (सहायक अभियंता), रविंद्र कुमार (अवर अभियंता), योगेंद्र कुमार वर्मा (अवर अभियंता), उमेश मोहन शर्मा (सहायक अभियंता), पिंकू गौतम (सहायक अभियंता), डीके गोयल (सहायक अभियंता), वीरेंद्र कुमार (अवर अभियंता), शशि भूषण (सहायक अभियंता), कमल सिंह (अवर अभियंता), संजीव शुक्ला (अवर अभियंता), एनके शर्मा (सहायक अभियंता), सुखबीर सिंह (अवर अभियंता), सोहनपाल (से.नि. सहायक अभियंता), शांति प्रसाद (से.नि. सहायक अभियंता), आरपी सिंह (से.नि. सहायक अभियंता), जगदीश कुमार अरोरा (अवर अभियंता), रतनवीर सिंह (अवर अभियंता), सुरेंद्र कुमार वडेरा (से.नि. सहायक अभियंता), देवराज वर्मा (से.नि. सहायक अभियंता), बसंत लाल मैनी (से.नि. अवर अभियंता), एके भटनागर (से.नि. अवर अभियंता), ओमपाल सिंह (अवर अभियंता), राम किशन शर्मा (अवर अभियंता), चंद्रभान कश्यप (से.नि. अधिशासी अभियंता), रियाजुद्दीन (अवर अभियंता), आरए वर्मा (अधिशासी अभियंता), जीत सिंह (अवर अभियंता), रविकांत (सहायक अभियंता), श्रीधर भांडेगावकर (से.नि. सहायक अभियंता), आरके सक्सेना (सहायक अभियंता), भोलानाथ (अधिशासी अभियंता), चंद्रपाल (अवर अभियंता) और मनोहर कुमार (से.नि. अधिशासी अभियंता) के नाम शामिल हैं। (इनमें से चार अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है)।
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