मेरठ। विद्युत विभाग में आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों की छंटनी के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब उग्र रूप धारण करता जा रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि छंटनी तुरंत नहीं रोकी गई तो इस आंदोलन को पूरे मेरठ जिले में विस्तार दिया जाएगा। शुक्रवार को आंदोलन के तीसरे दिन संविदा कर्मचारियों ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के मुख्यालय ऊर्जा भवन पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और शाम को कैंट विधायक अमित अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की।
निविदा-संविदा कर्मचारी सेवा समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ऊर्जा भवन पर विद्युत अधिकारियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का तर्क है कि वर्टिकल के नाम पर विभाग में कर्मियों की संख्या निरंतर घटाई जा रही है जबकि मेरठ महानगर में बिजली उपकेंद्रों, ट्रांसफार्मरों और उपभोक्ताओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
कर्मचारियों ने बताया कि पूर्व में कार्यरत 603 कर्मचारियों की संख्या को वर्ष 2026 में घटाकर 435 कर दिया गया है। इस कटौती के कारण 168 अनुभवी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और विद्युत व्यवस्था चरमराने की आशंका है।
पश्चिमांचल अध्यक्ष सचिन सिंह ने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग (लोड) बढ़ने से लाइनों में फाल्ट आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में अधिक जनशक्ति की आवश्यकता होती है लेकिन विभाग ने 168 कर्मचारियों को हटाकर व्यवस्था को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। उन्होंने विधायक से मांग की कि जनहित को देखते हुए इस छंटनी पर तत्काल रोक लगवाई जाए। इस अवसर पर अमित खारी, विनोद, रोहित, शिवम, मोहसिन, फैसल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
वैकल्पिक व्यवस्था से हो रही फाल्ट की मरम्मत
संविदा लाइनमैनों की हड़ताल के चलते शहर के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। लाइनों में आने वाले दोषों (फाल्ट) को ठीक करने के लिए विभाग को बाहर से निजी कर्मचारी बुलाने पड़े हैं। हालांकि, विद्युत अधिकारियों का दावा है कि वैकल्पिक प्रबंध किए गए हैं और जनता को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
सोमवार तक का अल्टीमेटम
कर्मचारी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सोमवार शाम तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन में ग्रामीण क्षेत्रों के संविदा कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया जाएगा। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों को हड़ताल से अलग रखा गया है, लेकिन उनके शामिल होते ही पूरे जिले की विद्युत व्यवस्था ठप हो सकती है।
ऊर्जा भवन में विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करते निविदा संविदा कर्मचारी सेवा समिति के पदाध