प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में श्री शांतिनाथ भगवान की जिन प्रतिमा के सम्मुख चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 38वें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शुभारंभ मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकरों के जलाभिषेक से किया गया। त्रिमूर्ति जिनालय में भक्तों ने विधान की मांगलिक क्रियाएं की। शांतिधारा प्रिंस जैन, कमलेश जैन, मंजू जैन, वंदना जैन, अवनि जैन, वाणी जैन, वैभव जैन, सचिन जैन, अंजलि, संगीता, शशांक जैन ने की।
मुनि भाव भूषण महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा कि संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं है, जितना की पड़ोसी के सुख को देखकर दुखी है। यह आत्मा तो निश्चय की अपेक्षा से शुद्ध है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति अगर अपने किए कराए पर संतोष रखे तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी और उसका जीवन पावन होगा। अगर वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथाह संपदा भी प्राप्त हो जाए तो वह सुखी नहीं हो सकता है, क्योंकि वह मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच के मद में चूर होकर असहज और अशांति का अनुभव करता है।
भक्तों ने शांतिनाथ भगवान की पूजन विधान करके 120 अर्घ्य मंडप पर समर्पित किए।
सायंकालीन बेला में संगीतमय आरती भक्ति, धार्मिक प्रश्नमंच आयोजित किया गया। विधान में शामिल पुरुषों एवं महिलाओं ने विधान स्थल पर संगीत की लहरियों पर भक्ति कर उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, विधान संयोजक विजय कुमार जैन, सुशील कुमार जैन, कपिल जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन आदि का सहयोग रहा।