मेरठ। उद्यमी रतन टाटा का निधन औद्योगिक जगह के लिए अपूर्णिय क्षति है। टाटा समूह को उन्होंने नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। ऑटोमोबाइल, सर्विस, स्ट्रीट सहित विभिन्न उद्योगों को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिखाई। इतिहासकार एके गांधी ने रतन टाटा की ऑटोबायोग्राफी लिखी। उन्होंने बताया कि सफल उद्यमी होने के पीछे उनकी सोच थी कि मैं पहले निर्णय करता हूं और फिर उसे सच्चा साबित करता हूं। यह उनके आत्मविश्वास और परिश्रम को दिखाता है।
इतिहासकार एके गांधी ने बताया कि रतन टाटा ने ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील तक के विभिन्न उद्योगों की जिम्मेदारी संभाली। 1996 में टीसीएस के सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कराया। गांधी ने बताया कि टाटा मोटर्स ने जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। इसके अलावा और बड़े निर्णय लिए। उन्होंने बताया कि रतन टाटा के सौम्य मुस्कुराहट से भरे चेहरे पर धीर गंभीर आंखें जब भी किसी व्यक्ति को देखतीं तो उसे ऐसा प्रतीत होता मानो वह उसके मानस को खंगाल रहे हों। गांधी ने बताया कि दिल्ली में एक बार उनसे मुलाकात हुई थी। वह एक झलक में व्यक्ति को पहचान लेते थे।
गांधी ने बताया कि जब रतन टाटा पहली बार उद्योग का दायित्व संभाला तो उनकी योग्यता और क्षमता पर संदेह किया गया। उन्हें कुछ वर्ष अवश्य लगे पर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि वह महान टाटा विरासत के योग्यतम प्रतिनिधियों में से एक हैं। उन पर पुस्तक लिखते समय मैं अनेक बार मंथन करने लगता था कि उन जैसी सादगी से भरपूर दिखाई देने वाले इंसान में आखिरकार ऐसा क्या था।