मेरठ। आवास एवं विकास परिषद न केवल अवैध निर्माण करा रहा है, बल्कि अपनी जमीन पर कब्जा भी करा रहा है। परिषद के अधिकारी नई सड़क स्थित भूखंड पर कब्जे के मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं। इससे साफ है कि भूमाफिया को परिषद ही संरक्षण दे रहा है। जिस खसरा नंबर के भूखंड का मामला सामने आया है, उनकी करीब 5800 वर्गमीटर जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। परिषद् के पास इसकी जानकारी नहीं है।
नई सड़क स्थित खसरा नंबर 6042 और 6043 की करीब 5800 वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया था। हालांकि उस वक्त आवास एवं विकास परिषद् ने गढ़ रोड से लेकर शास्त्रीनगर तक करीब 60 खसरा नंबर की लगभग 282 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया था। जिसमें आधी से ज्यादा जमीन पर कब्जा हो चुका है। इस पूरे मामले पर एमडीए तो खुलकर सामने आ रहा है, लेकिन आवास विकास परिषद् चुप्पी साधे बैठा है।
एमडीए के अनुसार उसका है कार्यक्षेत्र
एमडीए के तहसीलदार विपिन कुमार के अनुसार जहां सील लगाई है, वह उनके कार्यक्षेत्र में है। हालांकि एमडीए का यह दावा हास्यास्पद है। इसके बावजूद आवास एवं विकास परिषद् इस संबंध में एमडीए के दावे को पुख्ता कर रहा है। एमडीए ने सील लगाकर नोटिस चस्पा किया था कि यदि यह भूखंड आवास एवं विकास परिषद् की सीमा में है, तो हम सील हटा देंगे, लेकिन परिषद की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ है कि परिषद अपनी ही जमीन को जानबूझकर भूले बैठा है।
जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत
इस मामले में अधिवक्ता गौरव कुुमार ने जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। देखना यह है कि इस पर परिषद् के अधिकारी क्या जवाब देते हैं। आवास एवं विकास परिषद् ने अपनी जमीन पर पहले भी इसी तरह कब्जे कराए हैं। सूत्रों के अनुसार गढ़ रोड से नई सड़क शास्त्रीनगर के बीच करीब 50 हजार वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन पर परिषद् के अधिकारी साठगांठ कर कब्जा करा चुके हैं।