अमानगढ़ क्षेत्र में विवादित निर्माण पर नोटिस चस्पा करते वनकर्मी। स्रोत विभाग
बिजनौर। अमानगढ़ रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर दो मकान बना दिए गए। कमाल यह रहा कि रेंज के वनाधिकारी और वहां की निगरानी करने वाला पूरा स्टाफ इससे अनजान बना रहा। मकान बनने की सूचना मुख्यालय के वन अफसरों तक पहुंची तो आनन फानन में निर्माण करने वालों को नोटिस जारी कर दिए गए। वहीं रेंज अधिकारी और निगरानी करने वाले स्टाफ से डीएफओ ने स्पष्टीकरण मांगा है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की वन भूमि रामपुर कला तक फैली हुई है। पिछले काफी दिनों से वहां दो मकान बन रहे थे। उन पर लिंटर तक डाल दिया गया। इसकी शिकायत जिला मुख्यालय पर हुई तो एसडीओ स्तर से इसकी जांच की गई। वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय लेखपाल से भी जांच कराई गई। जांच में जहां निर्माण हुआ उसे वन भूमि बताया गया। मामला बढ़ा तो रेंजर अमानगढ़ की ओर से निर्माण को अवैध बताते हुए इसके ध्वस्तीकरण का पत्र डीएफओ को लिखा गया। वहीं एसडीओ ने भी इसकी जांच की।
जांच में निर्माण के समय रेंज के वन अधिकारियों व स्टाफ द्वारा लापरवाही सामने आई। अब एक ओर निर्माण को हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। वहीं दूसरी ओर डीएफओ और एसडीओ की ओर से रेंजर अमानगढ़ का स्पष्टीकरण मांगा गया है।
संवेदनशील है मामला, हो सकती है कार्रवाई : करीब दो साल पहले अमानगढ़ रेंज की सीमा से बाहर एक रिसॉर्ट का निर्माण हो रहा था। इसे संवेदनशील बताते हुए शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई की गई है। इसमें तत्कालीन डीएफओ अनिल पटेल को निलंबित भी कर दिया गया था। वह निर्माण भी आज तक पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में वन भूमि पर मकान बनने का मामला भी संवेदनशील बताया जा रहा है। इसमें कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।