बड़ी बेजा थीं वे। इतनी कि उनके अपने तक उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सके। दुनिया तो क्या करती। उनका कुसूर भी बहुत बड़ा था। जैसा कि लोग कहते हैं, उनके चरित्र खराब थे। लड़की होकर मर्यादा भूल गईं। जिसके बोझ तले उनका सारा वजूद दबा है, उस मर्यादा को भूलना गुनाह है। उसके बिना आसमीन और सोनम कोई मायने नहीं रखती। इसलिए झूठी आन की खातिर अपनों ने ही दोनों की बलि चढ़ा दी...
बागपत जनपद की दिव्यांग आसमीन और 17 साल की सोनम को मारने वालों का न कलेजा कांपा और न हाथ। सोनम को मारकर उसकी लाश जला दी गई। अवशेषों से उसकी पहचान हुई। घरवालों ने आसमीन की लाश तक को नहीं अपनाया। रिश्तेदारों ने उसे कफन नसीब कराया।