मेरठ। लॉकडाउन के चलते मध्य प्रदेश में फंसे 35 कामगारों को लेकर झांसी डिपो की बस शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे भैसाली बस स्टैंड पहुंची। इसमें चार कामगार मेरठ, दो हापुड़, छह पटियाला, 12 बागपत के तथा बाकी मोदीनगर एवं मुरादाबाद के थे। दो कामगारों को हापुड़ छोड़ा तथा 12 को बागपत भेजा गया। शेष 21 कामगारों की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की। मेरठ के चारों कामगारों को क्वारंटीन के लिए इंचौली भेज दिया है। स्टेशन अधीक्षक शिवदत्त सारस्वत ने बताया कि शाम को अलीगढ़ से मेरठ के तीन कामगार और आए थे। उन्हें जांचकर क्वारंटीन के लिए भेज दिया।
सरकार को बोला शुक्रिया
मेरठ पहुंचे कामगारों ने घर वापसी कराने के लिए सरकार का शुक्रिया किया। एमपी के बैतूल में गुड़ बनाने वाले मोदीनगर के कामगारों ने बताया कि गन्ना खत्म होने के बाद गुड़ बनना भी बंद हो गया। इसके बाद लॉकडाउन हो गया। भोजन भी किसी तरह एक समय मिल पा रहा था। वहीं, भोपाल से आए मुरादाबाद के कामगारों ने बताया कि वे कारपेंटर हैं। लॉकडाउन में फंसने पर घर की बहुत याद आ रही थी। कमरे का किराया तक नहीं दे पा रहे थे। मकान मालिक परेशान करता था। सरकार ने उन्हें घर वापसी कराकर अच्छा किया।
सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो रहा पालन
रोडवेज बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कराया जा रहा है। झांसी से बस में 35 कामगारों को लाया गया। हालांकि बस में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ केवल 25 लोग ही आ सकते हैं। रोडवेज अधिकारियों की लापरवाही लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है। एक संक्रमित व्यक्ति कई यात्रियों को संक्रमित कर सकता है।
दूसरे राज्यों और जिलों के कामगार भेजना बना सिरदर्द
कामगारों को लाने के लिए सही रणनीति नहीं अपनाई जा रही है। झांसी से भेजी गई बस में पटियाला और मुरादाबाद के भी कामगार भेज दिए। इससे रोडवेज अधिकारी पसोपेश में रहे कि यहां से इन्हें कैसे भेजा जाए। पटियाला के कामगारों को पंजाब जाने वाली बसों में बैठाना चाहिए था। देर रात तक कामगारों को उनके गंतव्य के लिए रवाना नहीं किया जा सका था। हालांकि इनके लिए भोजन और पानी आदि की सुविधा कराई गई थी।